पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: उद्देश्य, प्रमुख प्रावधान, महत्व और संशोधन

  • On: January 19, 2026
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पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 से संबंधित भारत के पर्यावरण कानून और प्रदूषण नियंत्रण की जानकारी

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) भारत का एक महत्वपूर्ण और व्यापक पर्यावरण कानून है, जिसे देश में पर्यावरण की सुरक्षा, सुधार और प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू किया गया। इसे अक्सर “अम्ब्रेला लेजिस्लेशन” कहा जाता है, क्योंकि यह जल अधिनियम, वायु अधिनियम जैसे पूर्ववर्ती कानूनों के तहत स्थापित विभिन्न प्राधिकरणों की गतिविधियों को समन्वित करने का कार्य करता है।

यह अधिनियम 1972 के स्टॉकहोम मानव पर्यावरण सम्मेलन के निर्णयों को लागू करने हेतु भारतीय संविधान के अनुच्छेद 253 के अंतर्गत बनाया गया।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 क्या है?

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 पूरे भारत में लागू होता है। यह अधिनियम उस तिथि से प्रभावी हुआ, जिसे केंद्र सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से घोषित किया।

इस अधिनियम के अनुसार, पर्यावरण में शामिल हैं:

  • जल (Water)
  • वायु (Air)
  • भूमि (Land)
  • जल, वायु और भूमि के बीच संबंध
  • मानव, अन्य जीव, पौधे, सूक्ष्मजीव एवं संपत्ति

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उद्देश्य

EPA, 1986 का मूल उद्देश्य मानव पर्यावरण की रक्षा एवं सुधार करना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • स्टॉकहोम सम्मेलन 1972 के निर्णयों का क्रियान्वयन
  • विभिन्न पर्यावरणीय एजेंसियों के कार्यों का समन्वय
  • पर्यावरण गुणवत्ता मानक निर्धारित करना
  • औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण और विनियमन
  • मानव, जीव-जंतु, वनस्पति और संपत्ति को पर्यावरणीय खतरों से बचाना
  • पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए कठोर दंड
  • सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा देना

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रमुख प्रावधान

1. केंद्र सरकार की शक्तियाँ (धारा 3 एवं 5)

इन धाराओं के तहत केंद्र सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है, जैसे:

  • उद्योगों को बंद करने का आदेश
  • बिजली या पानी की आपूर्ति बंद करना
  • प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी करना

2. प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और निवारण

  • कोई भी व्यक्ति या उद्योग निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषक तत्वों का उत्सर्जन नहीं कर सकता
  • खतरनाक पदार्थों का संचालन केवल निर्धारित सुरक्षा उपायों के अनुसार किया जा सकता है

3. निरीक्षण और प्रवेश का अधिकार

  • अधिकृत अधिकारी किसी भी स्थान में प्रवेश कर निरीक्षण कर सकते हैं, ताकि अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

4. पर्यावरण प्रयोगशालाएँ (धारा 12)

केंद्र सरकार को अधिकार है कि वह:

  • पर्यावरण प्रयोगशालाएँ स्थापित या मान्यता प्रदान करे
  • सरकारी विश्लेषकों (Government Analysts) की नियुक्ति करे, जो वायु, जल और मिट्टी के नमूनों की जाँच करें

दंड और दायित्व प्रावधान

सामान्य दंड

  • अधिकतम 5 वर्ष का कारावास
  • ₹1 लाख तक का जुर्माना
  • या दोनों

निरंतर उल्लंघन

  • प्रतिदिन ₹5,000 तक का अतिरिक्त जुर्माना

कंपनी या सरकारी विभाग की जिम्मेदारी

  • यदि अपराध किसी कंपनी या सरकारी विभाग द्वारा किया जाता है, तो विभागाध्यक्ष या प्रमुख अधिकारी दोषी माना जाएगा, जब तक वह यह सिद्ध न कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का महत्व

1. अम्ब्रेला कानून

यह भारत में पर्यावरण शासन की आधारशिला है और अन्य पर्यावरण कानूनों को एकीकृत करता है।

2. केंद्रीकृत शक्ति

केंद्र सरकार को सीधे आदेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव होती है।

3. नागरिक भागीदारी (Citizen Suit)

कोई भी नागरिक 60 दिन की सूचना देने के बाद पर्यावरण उल्लंघन के विरुद्ध न्यायालय में मामला दायर कर सकता है।

4. इको-सेंसिटिव ज़ोन

सरकार पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों को Eco-Sensitive Zones घोषित कर सकती है, जिससे जैव विविधता की रक्षा होती है।

Read Also : वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: उद्देश्य, प्रावधान और महत्व

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972

भारत ने इस सम्मेलन में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण हेतु कानून बनाने का संकल्प लिया।

संवैधानिक आधार

  • अनुच्छेद 253
  • अनुच्छेद 48-A (राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत)
  • अनुच्छेद 51-A(g) (नागरिकों का मौलिक कर्तव्य)

भोपाल गैस त्रासदी, 1984

मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसाव ने मौजूदा कानूनों की कमजोरियों को उजागर किया, जिसके परिणामस्वरूप EPA, 1986 लागू किया गया।

पर्यावरण संरक्षण (संशोधन) नियम, 2021–2023 (जन विश्वास अधिनियम)

विशेषता EPA 1986 (मूल) संशोधित प्रावधान
अपराध की प्रकृति आपराधिक अधिकांश मामलों में गैर-आपराधिक
सजा जेल + जुर्माना केवल भारी जुर्माना
अधिकतम जुर्माना ₹1 लाख ₹5 लाख से ₹5 करोड़
निरंतर उल्लंघन ₹5,000/दिन ₹1 लाख/दिन तक
निपटारा न्यायालय निर्णय अधिकारी द्वारा
धन का उपयोग सामान्य राजस्व पर्यावरण संरक्षण कोष

निष्कर्ष

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 भारतीय पर्यावरण कानून की रीढ़ है। यह सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के व्यापक अधिकार प्रदान करता है, लेकिन इसकी सफलता कठोर प्रवर्तन, न्यायपालिका की सक्रियता और जनभागीदारी पर निर्भर करती है। हालिया संशोधनों ने इसे अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और पर्यावरण पुनर्स्थापन की दिशा में उन्मुख बनाया है।

Tags: Environment Protection Act 1986, | Environmental Law in India, | Environment Protection Act Amendment 2023, | Environmental Governance in India,
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FAQ's

The CMAT City Intimation Slip is a document released by the National Testing Agency (NTA) that tells candidates the city where their CMAT 2026 exam centre has been allotted. It helps candidates plan travel and stay before the exam day.

No. The city slip only shows the allotted exam city, whereas the CMAT admit card (released later) contains full details including the actual centre address, exam timings, reporting instructions, and entry requirements.

You can download it from the official CMAT website at cmat.nta.nic.in by logging in using your application number and date of birth (or password) once the city slip link is active.

No. Once the city is allotted and shown on the city slip, you cannot change it later. Any changes must have been done during the application or correction window before the city slip was released.

Note your allotted city and prepare travel plans if required.

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