वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: उद्देश्य, प्रावधान और महत्व

  • On: January 16, 2026
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत भारत में बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों का संरक्षण दर्शाती छवि

भारत जैव विविधता से समृद्ध देशों में से एक है, लेकिन समय के साथ शिकार, अवैध व्यापार और प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने से वन्यजीवों पर गंभीर खतरा बढ़ा। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए भारत सरकार ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) लागू किया, जो आज भी देश का प्रमुख पर्यावरणीय कानून माना जाता है।

यह अधिनियम केवल शिकार को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लुप्तप्राय प्रजातियों को पूर्ण संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना और वन्यजीव व्यापार के नियमन पर केंद्रित है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का परिचय

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम को 21 अगस्त 1972 को भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया। इससे पहले भारत में केवल कुछ बिखरे हुए कानून मौजूद थे, जैसे Wild Birds and Animals Protection Act, 1912, जो पर्याप्त प्रभावी नहीं थे।

इस अधिनियम का उद्देश्य है:

  • जंगली जानवरों, पक्षियों और पौधों की रक्षा
  • उनके प्राकृतिक आवास (Habitat) का संरक्षण
  • वन्यजीवों और उनसे बने उत्पादों के व्यापार को नियंत्रित करना
  • राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों का प्रबंधन

साल 2022 में Wildlife Protection (Amendment) Act, 2022 लाया गया, जिससे यह कानून CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) के अनुरूप बनाया गया और प्रजातियों के वर्गीकरण को सरल किया गया।

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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रमुख उद्देश्य

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का मुख्य लक्ष्य भारत की पारिस्थितिक संतुलन और पर्यावरणीय सुरक्षा को बनाए रखना है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

1. शिकार पर प्रतिबंध

इस अधिनियम के तहत अनुसूचित (Scheduled) प्रजातियों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, विशेषकर लुप्तप्राय और संकटग्रस्त जीवों पर।

2. प्राकृतिक आवासों का संरक्षण

अधिनियम राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना और प्रबंधन का प्रावधान करता है।

3. वन्यजीव व्यापार का नियमन

हाथी दांत, खाल, सींग, पौधों और अन्य वन्यजीव उत्पादों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, जो CITES के अनुरूप हैं।

4. दंड और कानूनी कार्रवाई

कानून के उल्लंघन पर कठोर दंड, जुर्माना और कारावास का प्रावधान है ताकि अपराधों पर रोक लगाई जा सके।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम को समर्थन देने वाले संवैधानिक प्रावधान

भारत का संविधान भी वन्यजीव संरक्षण को मजबूत आधार प्रदान करता है:

अनुच्छेद संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 48A (DPSP) राज्य को पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा और सुधार का निर्देश
अनुच्छेद 51A(g) प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह प्राकृतिक पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा करे
सातवीं अनुसूची (42वां संशोधन, 1976) ‘वन’ और ‘वन्यजीव संरक्षण’ को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में डाला गया

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधान

यह अधिनियम विभिन्न अनुसूचियों (Schedules) के माध्यम से प्रजातियों को संरक्षण प्रदान करता है:

अनुसूची I और II

  • सर्वोच्च स्तर का संरक्षण
  • सबसे कठोर दंड का प्रावधान
  • उदाहरण: बाघ, शेर, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड

अनुसूची III और IV

  • गैर-लुप्तप्राय प्रजातियाँ
  • शिकार प्रतिबंधित, लेकिन दंड अपेक्षाकृत कम
  • उदाहरण: कुछ हिरण और पक्षी प्रजातियाँ

अनुसूची V

  • “Vermin” या हानिकारक प्रजातियाँ
  • विशेष परिस्थितियों में शिकार की अनुमति
  • उदाहरण: कौवा, फल चमगादड़

अनुसूची VI

  • विशेष पौधों की खेती और व्यापार का नियमन
  • उदाहरण: साइकैड (Cycad), बेडडोम्स (Beddomes)

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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रमुख योजनाएँ

प्रोजेक्ट टाइगर (1973)

भारत में बाघों की घटती संख्या को रोकने के लिए शुरू की गई सबसे सफल संरक्षण परियोजना।

प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992)

हाथियों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए शुरू की गई योजना।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का महत्व

  • भारत की जैव विविधता का संरक्षण
  • पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायक
  • अवैध शिकार और तस्करी पर नियंत्रण
  • भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत का संरक्षण
  • अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौतों के अनुरूप कानून

निष्कर्ष

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 न केवल एक कानूनी दस्तावेज है, बल्कि भारत की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 2022 के संशोधन के बाद यह अधिनियम और अधिक प्रभावी बन गया है। यदि सरकार और नागरिक मिलकर अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करें, तो भारत की जैव विविधता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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