रामपुर के ‘ज्ञान वाले पांडेय सर’: रिटायरमेंट के बाद मुफ्त शिक्षा की मिसाल बनी एक प्रेरणादायक कहानी

  • On: June 27, 2026
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रामपुर के अचल राज पांडे गरीब बच्चों को अपने घर में मुफ्त गणित पढ़ाते हुए, समाज सेवा और शिक्षा का दृश्य

रिटायरमेंट के बाद जब अधिकांश लोग आराम, यात्रा या शांत जीवन को चुनते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने अपने जीवन का दूसरा अध्याय समाज सेवा और शिक्षा को समर्पित कर दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व सहायक महाप्रबंधक (AGM) अचल राज पांडे, जिन्हें लोग प्यार से ‘ज्ञान वाले पांडेय सर’ कहते हैं, आज गरीब बच्चों के लिए उम्मीद की एक मजबूत किरण बन चुके हैं।

रामपुर के गायत्री पुरम इलाके में स्थित उनका घर अब केवल एक आवास नहीं, बल्कि एक निःशुल्क ज्ञान केंद्र बन चुका है, जहाँ हर दिन दर्जनों बच्चे अपने सपनों को साकार करने की तैयारी करते हैं।


बैंक अधिकारी से समाजसेवी शिक्षक बनने की प्रेरणादायक यात्रा

अचल राज पांडे ने फरवरी 2016 में लखनऊ से SBI के AGM पद से सेवानिवृत्ति ली। आर्थिक रूप से स्थिर जीवन होने के बावजूद उनके मन में एक अधूरा सपना था—शिक्षक बनने का।

युवावस्था में वे शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें बैंकिंग सेक्टर में पहुंचा दिया। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने उस सपने को फिर से जीने का निर्णय लिया और बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का संकल्प लिया।

इस कार्य में उनकी पत्नी, जो स्वयं केंद्रीय विद्यालय में शिक्षिका थीं, ने भी उनका पूरा साथ दिया। दोनों ने मिलकर अप्रैल 2016 में इस निःशुल्क पाठशाला की शुरुआत की।


गरीब बच्चों के लिए एक नई उम्मीद

रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में अधिकांश परिवार मजदूरी, खेती और छोटे व्यवसाय से जुड़े हैं। आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई अक्सर बीच में ही रुक जाती है, खासकर लड़कियों की।

इन्हीं परिस्थितियों को देखकर पांडेय सर ने तय किया कि वे हर संभव बच्चे को शिक्षा से जोड़ेंगे। उनका उद्देश्य स्पष्ट था—हर बेटी को कम से कम कक्षा 10 तक पढ़ाई जरूर पूरी कराना।

आज वे न सिर्फ मुफ्त पढ़ाते हैं, बल्कि कई बच्चों की फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और कॉपियों का खर्च भी स्वयं उठाते हैं।


पत्नी के साथ शुरू हुआ मिशन, लेकिन अकेले आगे बढ़ा संघर्ष

कोविड-19 महामारी के दौरान 2021 में अचल राज पांडे की पत्नी का निधन हो गया, जो इस मिशन की सह-संस्थापक थीं। यह उनके जीवन का सबसे कठिन समय था।

चार महीनों तक वे मानसिक रूप से टूट गए, लेकिन फिर उन्होंने महसूस किया कि बच्चों को छोड़ देना उनकी पत्नी के सपने को अधूरा छोड़ने जैसा होगा। इसके बाद उन्होंने फिर से चाक-डस्टर उठाया और पूरे समर्पण के साथ अपने मिशन को आगे बढ़ाया।


शिक्षा में सफलता की मिसाल

पांडेय सर की मेहनत और समर्पण का असर स्पष्ट दिखाई देता है। उनके पढ़ाए हुए कई छात्रों ने स्कूल स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

  • पिछले वर्ष हरि इंटर कॉलेज के टॉप-10 छात्रों में उनके 3 विद्यार्थी शामिल रहे
  • अब तक 165 से अधिक छात्र हाईस्कूल पास कर चुके हैं
  • इनमें 120 से अधिक छात्राएं शामिल हैं, जो इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है

यह आंकड़े साबित करते हैं कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी बड़े सपने साकार कर सकते हैं।


केवल पढ़ाई नहीं, संपूर्ण विकास पर ध्यान

पांडेय सर की शिक्षण शैली केवल किताबों तक सीमित नहीं है। वे हर महीने किसी ग्रामीण सरकारी विद्यालय में विशेष सत्र आयोजित करते हैं, जिसमें शामिल होता है:

  • सामान्य ज्ञान (GK)
  • पर्यावरण जागरूकता
  • करियर काउंसलिंग
  • टेस्ट और पुरस्कार प्रणाली

इसके साथ ही वे ‘क्लॉथ डोनेशन’ अभियान भी चलाते हैं, जिसके तहत जरूरतमंद बच्चों को अच्छे पुराने कपड़े उपलब्ध कराए जाते हैं।


15 जुलाई से नए बैच की शुरुआत

पांडेय सर जल्द ही कक्षा 10 के छात्रों के लिए गणित (Mathematics) का नया निशुल्क बैच शुरू करने जा रहे हैं।

इस बैच में उन बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और जो कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते।

उनका मानना है कि “पैसों की कमी किसी भी बच्चे के सपनों को रोक नहीं सकती।”


निष्कर्ष

अचल राज पांडे की कहानी केवल एक शिक्षक की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो समाज को बदलने की ताकत रखती है। उन्होंने यह साबित किया है कि सेवा भाव और शिक्षा के प्रति समर्पण से किसी भी समुदाय की दिशा बदली जा सकती है।

रामपुर के ‘ज्ञान वाले पांडेय सर’ आज हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा हैं—एक ऐसा उदाहरण जो बताता है कि असली सफलता पद या पैसा नहीं, बल्कि समाज के लिए किया गया योगदान है।

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FAQ's

अचल राज पांडे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व AGM हैं, जो रिटायरमेंट के बाद रामपुर में गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं।

वे मुख्य रूप से कक्षा 10 के छात्रों को गणित (Mathematics) की मुफ्त कोचिंग देते हैं।

उन्होंने अप्रैल 2016 में अपनी पत्नी के साथ मिलकर इस निःशुल्क पाठशाला की शुरुआत की थी।

अब तक 165 से अधिक बच्चे हाईस्कूल पास कर चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या लड़कियों की है।

नहीं, वे फीस, किताबें, कॉपियां, कपड़े और करियर काउंसलिंग जैसी मदद भी बच्चों को उपलब्ध कराते हैं।

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