Success Story: कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी करती थीं रांची की सावित्री, आज जैविक खेती और नर्सरी बिजनेस से कमा रही हैं ₹50 हजार महीना

  • On: June 29, 2026
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रांची की सावित्री खजूर अपनी नर्सरी और जैविक खेती व्यवसाय के साथ

Ranchi Success Story: मेहनत, सीख और आत्मविश्वास ने बदली सावित्री की जिंदगी

आज के समय में खेती केवल पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि नए और जैविक मॉडल अपनाकर भी अच्छी कमाई का जरिया बन चुकी है। झारखंड की राजधानी रांची के पास स्थित बेड़ों गांव की रहने वाली सावित्री खजूर इसकी बेहतरीन मिसाल हैं। एक समय ऐसा था जब वह दूसरों के खेतों में मजदूरी करती थीं, लेकिन आज वह अपना नर्सरी व्यवसाय और जैविक उत्पाद तैयार कर हर महीने 50 हजार रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं।

मजदूरी से शुरू हुआ सफर, आज खुद संभाल रही हैं बिजनेस

सावित्री बताती हैं कि पहले उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण था। रोज़गार के लिए उन्हें दूसरों के खेतों में काम करना पड़ता था। उस समय न तो तकनीक की जानकारी थी और न ही व्यवसाय शुरू करने का अनुभव।

लेकिन बदलाव तब आया जब उन्होंने एक स्वयंसेवी संस्था (NGO) के माध्यम से प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें आधुनिक और जैविक खेती के नए मॉडल समझने में मदद की।

आज वह खुद स्कूटी चलाकर अपने काम संभालती हैं और मोबाइल फोन के जरिए बिजनेस से जुड़े कई काम करती हैं।

जैविक दवाइयों ने बदल दी तस्वीर

प्रशिक्षण के बाद सावित्री ने जैविक खेती में उपयोग होने वाली प्राकृतिक दवाइयों को तैयार करना शुरू किया। इनमें शामिल हैं—

  • ब्रह्मास्त्र

  • नीमस्त्र

  • अग्निअस्त्र

इन दवाइयों को बनाने के लिए वह पूरी तरह प्राकृतिक चीजों का उपयोग करती हैं जैसे—

  • गोबर और गोमूत्र

  • किचन का जैविक कचरा

  • सब्जियों के छिलके

  • सहजन के पत्ते

  • सड़ा हुआ गोबर

इन उत्पादों की मांग किसानों के बीच लगातार बढ़ रही है।

छोटी जमीन पर शुरू की नर्सरी, अब बन गई आय का बड़ा स्रोत

जैविक दवाइयों के साथ-साथ सावित्री ने अपनी जमीन पर नर्सरी शुरू की। यहां वह कई प्रकार के पौधे तैयार करती हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • महोगनी

  • आम

  • जामुन

  • अन्य फलदार पौधे

महोगनी के पौधों की बाजार में अच्छी मांग है और एक पौधे की कीमत लगभग ₹300–₹400 तक पहुंच जाती है।

आज चला रही हैं अपनी दुकान

सावित्री अब केवल उत्पादन ही नहीं करतीं बल्कि अपनी दुकान के माध्यम से जैविक उत्पादों की पैकेजिंग और बिक्री भी करती हैं। किसान सीधे उनसे जैविक दवाइयां और पौधे खरीदने पहुंचते हैं।

उनका मानना है कि सरकारी योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकते हैं।

महिलाओं और किसानों के लिए बनी प्रेरणा

सावित्री की कहानी दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर सही दिशा और प्रशिक्षण मिले तो खेती और ग्रामीण व्यवसाय से आत्मनिर्भर बना जा सकता है।

आज वह कई लोगों के लिए प्रेरणा हैं और अन्य किसानों को भी नई तकनीक और जैविक मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

निष्कर्ष

रांची की सावित्री खजूर ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, सही प्रशिक्षण और नए विचारों के साथ खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है। कभी मजदूरी करने वाली सावित्री आज न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हैं बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए सफलता की मिसाल भी बन चुकी हैं।

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Tags: Success Story, | Ranchi Success Story, | Savitri Khajur, | Organic Farming, | Nursery Business, | Women Success Story, | Jharkhand News, | Organic Agriculture,
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FAQ's

सावित्री खजूर झारखंड के रांची जिले के बेड़ों गांव की महिला उद्यमी हैं, जिन्होंने जैविक खेती और नर्सरी व्यवसाय से सफलता हासिल की।

वह पहले दूसरों के खेतों में मजदूरी करती थीं और बाद में प्रशिक्षण लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया।

वह ब्रह्मास्त्र, नीमस्त्र और अग्निअस्त्र जैसी जैविक दवाइयां तैयार करती हैं।

नर्सरी और जैविक उत्पादों के जरिए वह हर महीने ₹50,000 से अधिक की कमाई कर रही हैं।

एनजीओ से प्रशिक्षण, जैविक खेती के मॉडल और लगातार मेहनत ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद की।

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