Career Tips: बहस को हार-जीत का मंच न बनाएं, नए दृष्टिकोण अपनाने का अवसर बनाएं

  • On: January 7, 2026
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Career Tips में बहस को हार-जीत की बजाय नए दृष्टिकोण अपनाने का अवसर बताते हुए संवाद करता प्रोफेशनल

आज के प्रोफेशनल माहौल में बहस (Debate) आम बात है—चाहे वह ऑफिस मीटिंग हो, टीम डिस्कशन हो या किसी फैसले पर असहमति। लेकिन अक्सर हम बहस को जीत-हार की लड़ाई बना लेते हैं। Harvard Business Review में प्रकाशित जोना बर्जर के विचार बताते हैं कि किसी की सोच बदलने का सही तरीका तर्कों की बौछार नहीं, बल्कि सुनना, समझना और सम्मान देना है।

तर्क नहीं, विश्वास से बदलती है सोच

किसी व्यक्ति की राय या सोच बदलने की प्रक्रिया की शुरुआत विश्वास और समझ से होती है। जब हम सामने वाले को ध्यान से सुनते हैं और यह दिखाते हैं कि उसकी राय हमारे लिए मायने रखती है, तभी संवाद की मजबूत नींव पड़ती है। सीधे यह कह देना कि “आप गलत हैं”, अक्सर सामने वाले को रक्षात्मक बना देता है।

सहानुभूति दिखाएं, खुले प्रश्न पूछें

बहस को सार्थक बनाने के लिए जरूरी है कि हम सहानुभूति (Empathy) दिखाएं और खुले प्रश्न पूछें, जैसे—
“आप ऐसा क्यों सोचते हैं?”
इस तरह के सवाल सामने वाले को अपने विचारों पर आत्मनिरीक्षण करने का मौका देते हैं और संवाद को टकराव की बजाय सहयोग की दिशा में ले जाते हैं।

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साझा बिंदुओं से आगे बढ़े संवाद

सार्थक बातचीत के लिए साझा आधार खोजना बेहद जरूरी है। जब बातचीत समान मूल्यों, अनुभवों या लक्ष्यों से जुड़ती है, तो सामने वाला खुद को अलग-थलग महसूस नहीं करता। इससे बातचीत सहज होती है और नए दृष्टिकोण अपनाने की संभावना बढ़ती है।

वास्तविक उदाहरण और कहानियों का करें इस्तेमाल

सिर्फ तथ्य या आंकड़े रखने से हर बार बात नहीं बनती। कहानियां और वास्तविक उदाहरण धीरे-धीरे व्यक्ति के मन में सवाल पैदा करते हैं और उसे अपनी धारणाओं पर दोबारा सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। यह बदलाव को स्वाभाविक बनाता है, न कि थोपा हुआ।

बहस नहीं, सहयोग का माहौल बनाएं

संवाद का उद्देश्य सामने वाले को हराना नहीं, बल्कि मिलकर सही निष्कर्ष तक पहुंचना होना चाहिए। मार्गदर्शन का मतलब अपनी राय थोपना नहीं, बल्कि विकल्पों और उनके परिणामों को समझने में मदद करना है। जब चर्चा को सहयोगी प्रयास के रूप में पेश किया जाता है, तो सामने वाला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करता है।

सम्मान के साथ रखें अपनी बात

किसी की पहचान या भावनाओं पर हमला किए बिना, केवल उसके विचारों और तर्कों पर सम्मान के साथ चर्चा करना ज्यादा प्रभावी होता है। गहरी मान्यताएं भावनाओं से जुड़ी होती हैं, इसलिए उन्हें बदलने के लिए संवेदनशीलता जरूरी है।

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निष्कर्ष

Career growth और मजबूत प्रोफेशनल रिश्तों के लिए जरूरी है कि हम बहस को हार-जीत का मंच न बनाएं, बल्कि सीखने और नए दृष्टिकोण अपनाने का अवसर समझें। सहानुभूति, सम्मान और सहयोग से किया गया संवाद न सिर्फ रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि हमें बेहतर निर्णय लेने में भी मदद करता है।

Tags: Career Tips Hindi, | Communication Skills, | Debate Skills, | Professional Growth,
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