Treaty of Purandar क्या था? 1665 और 1776 की संधियों का ऐतिहासिक महत्व

  • On: February 19, 2026
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ट्रीटी ऑफ पुरंदर 1665 – शिवाजी महाराज, पुरंदर किला और मुगल संधि का ऐतिहासिक दृश्य

ट्रीटी ऑफ पुरंदर 1665 भारतीय इतिहास की उन महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, जिसने दक्कन की राजनीति और मुगल–मराठा संबंधों की दिशा बदल दी। यह संधि मराठा शासक Chhatrapati Shivaji Maharaj और मुगल साम्राज्य के बीच हुई थी। बाद में 1776 में मराठों और British East India Company के बीच भी एक दूसरी संधि हुई, जिसे भी “ट्रीटी ऑफ पुरंदर” कहा जाता है।

इस लेख में हम 1665 और 1776 की दोनों संधियों का विस्तृत ऐतिहासिक विश्लेषण करेंगे।

ट्रीटी ऑफ पुरंदर 1665 क्या थी?

1665 में मुगल सम्राट Aurangzeb ने मराठा शक्ति को दबाने के लिए एक विशाल सेना भेजी, जिसका नेतृत्व आमेर के राजपूत सेनापति Jai Singh I कर रहे थे। मुगल सेना ने महाराष्ट्र के प्रसिद्ध Purandar Fort को घेर लिया।

लंबे घेराव और भारी सैन्य दबाव के बाद शिवाजी महाराज ने आगे के विनाश को रोकने के लिए कूटनीतिक रास्ता चुना। 11 जून 1665 को “ट्रीटी ऑफ पुरंदर” पर हस्ताक्षर हुए।

संधि की मुख्य शर्तें

  • शिवाजी महाराज ने अपने 35 में से 23 किले मुगलों को सौंप दिए

  • इन किलों से लगभग 40 हून (तत्कालीन मुद्रा) का वार्षिक राजस्व मुगलों को मिलता था।

  • शिवाजी को शेष 12 किलों पर नियंत्रण रखने की अनुमति मिली।

  • शिवाजी के पुत्र शंभाजी को मुगल दरबार भेजा गया, जहाँ उन्हें 500 का मंसब (सैन्य पद) दिया गया।

  • शिवाजी ने मुगलों की ओर से बीजापुर के खिलाफ अभियान में सहायता करने पर सहमति दी।

  • शिवाजी को आगरा दरबार में औरंगजेब से मिलने जाना था, जहाँ बाद में उन्हें नजरबंद कर दिया गया और उन्होंने प्रसिद्ध पलायन किया।


ट्रीटी ऑफ पुरंदर 1665 की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1. मराठा शक्ति का उदय

शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठा साम्राज्य दक्कन में तेजी से उभर रहा था। उन्होंने कई रणनीतिक किलों पर कब्जा कर मुगल सत्ता को चुनौती दी।

2. अफजल खान की पराजय

बीजापुर के सेनापति अफजल खान की हार ने शिवाजी की प्रतिष्ठा बढ़ाई।

3. पुणे और सूरत पर आक्रमण

  • 1663 में शाइस्ता खान पर हमला

  • 1664 में सूरत पर छापा, जिससे मुगलों को आर्थिक और प्रतिष्ठात्मक नुकसान हुआ

इन घटनाओं के बाद औरंगजेब ने निर्णायक कार्रवाई का आदेश दिया, जिसके परिणामस्वरूप पुरंदर का घेराव हुआ।

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ट्रीटी ऑफ पुरंदर 1665 का महत्व

1. रणनीतिक संरक्षण

23 किले सौंपकर भी शिवाजी ने अपने राज्य की मूल संरचना और प्रशासन को सुरक्षित रखा।

2. मुगल मान्यता

पहली बार मुगल साम्राज्य ने मराठों को एक संगठित राजनीतिक शक्ति के रूप में स्वीकार किया।

3. आगरा घटना और स्वतंत्रता संग्राम

आगरा में नजरबंदी और उसके बाद शिवाजी का साहसिक पलायन मराठा स्वतंत्रता संग्राम का नया अध्याय बना।

4. दक्कन की राजनीति में बदलाव

इस संधि ने अस्थायी रूप से मराठों और मुगलों को बीजापुर के विरुद्ध एक साथ ला दिया, जिससे दक्षिण भारत की शक्ति संतुलन बदल गया।


ट्रीटी ऑफ पुरंदर 1776 क्या थी?

1776 में एक दूसरी “ट्रीटी ऑफ पुरंदर” हुई, जो मराठा साम्राज्य और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच थी। यह संधि प्रथम आंग्ल–मराठा युद्ध के दौरान हुई।

मुख्य पक्ष

मराठा पक्ष का प्रतिनिधित्व Nana Fadnavis ने किया।

अंग्रेजों की ओर से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (कलकत्ता काउंसिल) थी।

पेशवा पद पर Madhavrao II को मान्यता दी गई।

प्रमुख परिणाम

  • अंग्रेजों ने माधवराव द्वितीय को वैध पेशवा स्वीकार किया।

  • अंग्रेजी विस्तार को अस्थायी रूप से रोका गया।

  • यह संधि मराठा आंतरिक राजनीति में अंग्रेजी हस्तक्षेप का प्रतीक बनी।


1665 और 1776 की संधियों में अंतर

विशेषता 1665 की संधि 1776 की संधि
मुख्य पक्ष शिवाजी महाराज और मुगल मराठा और ब्रिटिश
पृष्ठभूमि मुगल–मराठा संघर्ष प्रथम आंग्ल–मराठा युद्ध
प्रमुख परिणाम 23 किलों का समर्पण माधवराव II की मान्यता
दीर्घकालिक प्रभाव मराठा साम्राज्य का उदय ब्रिटिश हस्तक्षेप की शुरुआत

निष्कर्ष

ट्रीटी ऑफ पुरंदर 1665 और 1776 दोनों ही भारतीय इतिहास में शक्ति संतुलन बदलने वाली घटनाएँ थीं।

  • 1665 की संधि ने मराठा शक्ति को अस्थायी झटका दिया, लेकिन अंततः यही कूटनीतिक निर्णय मराठा साम्राज्य के विस्तार की नींव बना।

  • 1776 की संधि ने ब्रिटिश हस्तक्षेप को संस्थागत रूप दिया, जिसने आगे चलकर भारत में अंग्रेजी प्रभुत्व की राह आसान की।

इस प्रकार, “ट्रीटी ऑफ पुरंदर” केवल एक समझौता नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने वाला ऐतिहासिक मोड़ था।

Tags: Maratha Empire history, | Aurangzeb and Shivaji, | Treaty of Purandar 1665, | Treaty of Purandar 1776, | Purandar Fort history,
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The CMAT City Intimation Slip is a document released by the National Testing Agency (NTA) that tells candidates the city where their CMAT 2026 exam centre has been allotted. It helps candidates plan travel and stay before the exam day.

No. The city slip only shows the allotted exam city, whereas the CMAT admit card (released later) contains full details including the actual centre address, exam timings, reporting instructions, and entry requirements.

You can download it from the official CMAT website at cmat.nta.nic.in by logging in using your application number and date of birth (or password) once the city slip link is active.

No. Once the city is allotted and shown on the city slip, you cannot change it later. Any changes must have been done during the application or correction window before the city slip was released.

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