स्ट्रोक के बाद हर सेकेंड कीमती: हर मिनट मर सकती हैं 19 लाख ब्रेन सेल्स, जानिए शुरुआती लक्षण और इलाज

  • On: May 16, 2026
Follow Us:
स्ट्रोक के लक्षण और इलाज की जानकारी देते डॉक्टर और ब्रेन हेल्थ अवेयरनेस

स्ट्रोक (Stroke) एक बेहद गंभीर और जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिमाग के किसी हिस्से तक खून का प्रवाह अचानक रुक जाता है या बहुत कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में दिमाग को ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे कुछ ही मिनटों में ब्रेन सेल्स नष्ट होने लगती हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर समय पर इलाज न मिले तो हर मिनट करीब 19 लाख ब्रेन सेल्स डैमेज हो सकती हैं। यही वजह है कि स्ट्रोक आने के बाद हर सेकेंड बेहद कीमती माना जाता है।

स्ट्रोक क्या होता है?

स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नस ब्लॉक हो जाती है या फट जाती है। इसके कारण ब्रेन के प्रभावित हिस्से को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वहां की कोशिकाएं तेजी से मरने लगती हैं। स्ट्रोक का असर व्यक्ति की बोलने की क्षमता, याददाश्त, शरीर की मूवमेंट और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ सकता है।

क्यों खतरनाक है स्ट्रोक?

शालीमार बाग स्थित Max Hospital में न्यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. मनोज खनाल के अनुसार, स्ट्रोक के इलाज में जितनी देरी होती है, दिमाग को उतना ज्यादा नुकसान पहुंचता है। समय पर इलाज न मिलने पर मरीज को जीवनभर के लिए विकलांगता, लकवा या मौत का खतरा हो सकता है।

स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण जिन्हें भूलकर भी नजरअंदाज न करें

स्ट्रोक के लक्षण आमतौर पर अचानक दिखाई देते हैं। इन्हें पहचानने के लिए डॉक्टर BEFAST या FAST फॉर्मूला अपनाने की सलाह देते हैं।

B – Balance (संतुलन बिगड़ना)

  • अचानक चक्कर आना
  • चलने में लड़खड़ाहट
  • शरीर का संतुलन खो देना

E – Eyes (आंखों की समस्या)

  • धुंधला दिखाई देना
  • एक या दोनों आंखों से दिखना बंद होना

F – Face Drooping (चेहरा टेढ़ा होना)

  • चेहरे का एक हिस्सा नीचे लटकना
  • मुस्कुराने पर चेहरा असमान दिखना

A – Arm Weakness (हाथ में कमजोरी)

  • एक हाथ सुन्न होना
  • हाथ उठाने में कमजोरी महसूस होना

S – Speech Difficulty (बोलने में परेशानी)

  • शब्द साफ न बोल पाना
  • बोलते समय लड़खड़ाहट
  • वाक्य पूरा न कर पाना

T – Time to Call Emergency (तुरंत मदद लें)

  • ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी मेडिकल सहायता लें
  • मरीज को जल्द से जल्द स्ट्रोक ट्रीटमेंट वाले अस्पताल पहुंचाना जरूरी है

स्ट्रोक के बाद देरी क्यों खतरनाक है?

जब दिमाग तक खून पहुंचना बंद हो जाता है, तो हर गुजरता मिनट दिमाग के लिए नुकसानदायक होता है। इलाज में देरी से मरीज को कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

  • शरीर के किसी हिस्से में लकवा
  • बोलने में स्थायी दिक्कत
  • याददाश्त कमजोर होना
  • आंखों की रोशनी प्रभावित होना
  • सोचने और समझने की क्षमता कम होना

स्ट्रोक का इलाज कैसे किया जाता है?

1. थ्रोम्बोलिटिक थेरेपी

इस उपचार में ऐसी दवाएं दी जाती हैं जो खून के थक्के (Blood Clot) को घोलने का काम करती हैं। इससे दिमाग में खून का बहाव दोबारा शुरू हो जाता है। यह इलाज स्ट्रोक के लक्षण शुरू होने के 4.5 घंटे के भीतर सबसे प्रभावी माना जाता है।

2. मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी

अगर खून का थक्का बड़ी धमनी में फंसा हो, तो डॉक्टर खास उपकरणों की मदद से नसों के जरिए सीधे थक्के को निकालते हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर 6 घंटे के भीतर सबसे ज्यादा सफल रहती है, हालांकि कुछ मामलों में बाद में भी की जा सकती है।

स्ट्रोक से बचाव के आसान उपाय

  • ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखें
  • डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करवाएं
  • धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं
  • रोजाना एक्सरसाइज करें
  • संतुलित और हेल्दी डाइट लें
  • तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें

निष्कर्ष

स्ट्रोक एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें “समय ही जीवन” होता है। इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत इलाज करवाना मरीज की जान बचा सकता है और गंभीर विकलांगता से भी बचा सकता है। अगर किसी व्यक्ति में अचानक चेहरा टेढ़ा होना, बोलने में परेशानी या हाथ-पैर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए तुरंत अस्पताल पहुंचें।

Tags: Health Tips Hindi, | Brain Health, | Stroke Prevention, | Medical Emergency, | Health News Hindi, | Stroke Awareness, | BEFAST Symptoms, | Brain Stroke Hindi,
Share this post:

FAQ's

अचानक चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ में कमजोरी और बोलने में परेशानी स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल या इमरजेंसी मेडिकल सेंटर ले जाना चाहिए।

अगर समय पर इलाज मिल जाए तो कई मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।

पहले 4.5 घंटे इलाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

हां, खराब लाइफस्टाइल, तनाव और बीमारियों के कारण युवाओं में भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है।

0 Comments

No reviews yet.

Leave A Comment

Latest Post