राज्यसभा (Rajya Sabha): सीटें, सदस्य, योग्यता, चुनाव, शक्तियाँ और सभापति

  • On: March 7, 2026
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भारत की संसदीय व्यवस्था द्विसदनीय (Bicameral) है, जिसमें दो सदन होते हैं—लोकसभा (निचला सदन) और राज्यसभा (उच्च सदन)। राज्यसभा को Council of States भी कहा जाता है, क्योंकि यह भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 से 122 के अंतर्गत संसद की संरचना का उल्लेख किया गया है, जिसमें राज्यसभा को संसद का स्थायी सदन (Permanent House) बनाया गया है।

राज्यसभा का मुख्य उद्देश्य संसद द्वारा पारित विधेयकों की दूसरी समीक्षा (Second Review) करना और राज्यों के हितों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना है। यही कारण है कि इसे अक्सर “House of Elders” भी कहा जाता है।

राज्यसभा का गठन 3 अप्रैल 1952 को हुआ था और इसकी पहली बैठक 13 मई 1952 को हुई थी।


राज्यसभा क्या है? (What is Rajya Sabha)

राज्यसभा भारत की संसद का उच्च सदन (Upper House) है, जिसे Council of States भी कहा जाता है। इसका गठन अनुच्छेद 79 के तहत किया गया है।

यह एक स्थायी सदन है, यानी इसे लोकसभा की तरह भंग (Dissolve) नहीं किया जा सकता।

राज्यसभा की प्रमुख विशेषताएँ:

  • यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है।

  • यह संसद में पारित विधेयकों की समीक्षा करती है।

  • इसके सदस्य अपेक्षाकृत अनुभवी और वरिष्ठ राजनेता होते हैं।

  • इसकी सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष है।

इस प्रकार, राज्यसभा भारतीय लोकतंत्र में संघीय संतुलन (Federal Balance) बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


राज्यसभा की संरचना (Composition of Rajya Sabha)

राज्यसभा की संरचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के अंतर्गत निर्धारित की गई है।

अधिकतम सदस्य संख्या

राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 हो सकती है।

वर्तमान सदस्य संख्या

वर्तमान में राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं:

  • 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं

  • 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जाते हैं

राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य

राष्ट्रपति उन व्यक्तियों को राज्यसभा में नामित करते हैं जिनका विशेष योगदान निम्न क्षेत्रों में होता है:

  • कला

  • साहित्य

  • विज्ञान

  • सामाजिक सेवा

यह व्यवस्था संसद में विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करती है।


राज्यसभा में सीटों का वितरण (Rajya Sabha Seats Distribution)

राज्यसभा में सीटों का वितरण संविधान की चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) के अनुसार किया जाता है।

सीटों का आवंटन मुख्य रूप से राज्यों की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, इसलिए बड़े राज्यों को अधिक सीटें मिलती हैं और छोटे राज्यों को कम।

उदाहरण के लिए:

  • उत्तर प्रदेश – सबसे अधिक सीटें

  • महाराष्ट्र – उच्च प्रतिनिधित्व

  • बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु – प्रमुख प्रतिनिधित्व

इस व्यवस्था से राज्यों को राष्ट्रीय नीति निर्माण में प्रतिनिधित्व मिलता है।


राज्यसभा के सदस्य कैसे चुने जाते हैं? (Election of Rajya Sabha Members)

राज्यसभा के सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव से नहीं चुने जाते, बल्कि उनका चुनाव अप्रत्यक्ष (Indirect Election) होता है।

चुनाव कौन करता है

राज्यसभा के चुनाव में मतदान करते हैं:

  • राज्यों की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य (MLAs)

ध्यान दें: नामित विधायक मतदान नहीं कर सकते।


चुनाव की प्रणाली

राज्यसभा चुनाव में Proportional Representation by Single Transferable Vote (STV) प्रणाली का उपयोग किया जाता है।

इस प्रणाली में:

  • विधायक केवल एक उम्मीदवार को वोट नहीं देते

  • वे उम्मीदवारों को प्राथमिकता क्रम (1,2,3,4) में रैंक करते हैं


कोटा प्रणाली (Quota System)

किसी उम्मीदवार के जीतने के लिए एक निश्चित कोटा (Quota) प्राप्त करना आवश्यक होता है।

कोटा का सूत्र

कोटा = (कुल वैध वोट / (खाली सीटें + 1)) + 1

यदि किसी उम्मीदवार को कोटा से अधिक वोट मिल जाते हैं, तो अतिरिक्त वोट अन्य उम्मीदवारों को स्थानांतरित कर दिए जाते हैं।


ओपन बैलेट सिस्टम (Open Ballot System)

2003 में Representation of the People Act में संशोधन के बाद राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलेट सिस्टम लागू किया गया।

इसमें:

  • विधायक को अपना वोट अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना होता है

  • इससे क्रॉस वोटिंग को रोकने में मदद मिलती है


राज्यसभा सदस्य बनने की योग्यता (Qualification)

राज्यसभा सदस्य बनने की योग्यता अनुच्छेद 84 और Representation of the People Act, 1951 के अंतर्गत निर्धारित की गई है।

उम्मीदवार को:

  • भारत का नागरिक होना चाहिए

  • न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए

  • संसद द्वारा निर्धारित अन्य योग्यताएँ पूरी करनी चाहिए

  • किसी भी सरकारी लाभ के पद (Office of Profit) पर नहीं होना चाहिए


राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल (Tenure)

राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए इसे भंग नहीं किया जाता।

सदस्य का कार्यकाल

  • प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।

रिटायरमेंट प्रणाली

  • हर 2 वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

इस व्यवस्था से संसद में निरंतरता (Continuity) बनी रहती है।


राज्यसभा के सभापति और उपसभापति (Chairman and Deputy Chairman)

सभापति (Chairman)

राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं।

सभापति की मुख्य भूमिकाएँ:

  • सदन की कार्यवाही का संचालन

  • नियमों का पालन सुनिश्चित करना

  • अनुशासन बनाए रखना

उपसभापति (Deputy Chairman)

  • राज्यसभा के सदस्य अपने बीच से उपसभापति का चुनाव करते हैं

  • सभापति की अनुपस्थिति में वही सदन की कार्यवाही चलाते हैं

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राज्यसभा की शक्तियाँ और कार्य (Powers and Functions)

राज्यसभा भारतीय संसद का महत्वपूर्ण अंग है और इसके कई महत्वपूर्ण अधिकार हैं।

1. विधायी शक्तियाँ

  • सामान्य विधेयकों को पारित करने में राज्यसभा की भूमिका लोकसभा के बराबर होती है।

2. वित्तीय शक्तियाँ

  • मनी बिल केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

  • राज्यसभा इसे 14 दिनों तक रोक सकती है।

3. संवैधानिक संशोधन

संविधान संशोधन के लिए राज्यसभा की स्वीकृति आवश्यक होती है।

4. संघीय शक्तियाँ

राज्यसभा विशेष प्रस्ताव पारित कर:

  • राज्य सूची के विषयों पर संसद को कानून बनाने की अनुमति दे सकती है।

5. आपातकालीन शक्तियाँ

आपातकाल की घोषणा को मंजूरी देने में राज्यसभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


राज्यसभा का महत्व (Importance of Rajya Sabha)

राज्यसभा भारतीय लोकतंत्र में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाती है:

  • राज्यों के हितों की रक्षा

  • कानूनों की गहन समीक्षा

  • अनुभवी नेताओं की भागीदारी

  • संघीय व्यवस्था को मजबूत बनाना

इसी कारण इसे भारतीय संसद का महत्वपूर्ण संतुलनकारी सदन माना जाता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

राज्यसभा भारत की संसदीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह न केवल राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है बल्कि संसद द्वारा बनाए जाने वाले कानूनों की गहन समीक्षा भी करती है।

एक स्थायी सदन होने के कारण यह संसद में निरंतरता और स्थिरता बनाए रखती है। राज्यसभा की संरचना, चुनाव प्रक्रिया और शक्तियाँ भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

Tags: Rajya Sabha qualifications, | UPSC Polity Rajya Sabha, | Council of States India, | Rajya Sabha members, | Indian Parliament Upper House,
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FAQ's

The CMAT City Intimation Slip is a document released by the National Testing Agency (NTA) that tells candidates the city where their CMAT 2026 exam centre has been allotted. It helps candidates plan travel and stay before the exam day.

No. The city slip only shows the allotted exam city, whereas the CMAT admit card (released later) contains full details including the actual centre address, exam timings, reporting instructions, and entry requirements.

You can download it from the official CMAT website at cmat.nta.nic.in by logging in using your application number and date of birth (or password) once the city slip link is active.

No. Once the city is allotted and shown on the city slip, you cannot change it later. Any changes must have been done during the application or correction window before the city slip was released.

Note your allotted city and prepare travel plans if required.

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