M.Com पास युवक ने अमरूद की खेती से लिखी सफलता की नई कहानी, 2000 पेड़ों से 1.2 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर

  • On: June 5, 2026
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M.Com graduate young farmer Prakhar Prashant Pandey standing in a guava orchard with high-yield guava trees in Ballia Uttar Pradesh

Guava Farming Success Story: नौकरी छोड़ खेती में बनाया करोड़ों का कारोबार

आज के समय में जहां अधिकांश युवा सरकारी और निजी नौकरियों की तलाश में भटक रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक युवा किसान ने खेती के क्षेत्र में ऐसी मिसाल पेश की है, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। M.Com की पढ़ाई पूरी करने के बाद इस युवा ने नौकरी की बजाय आधुनिक बागवानी को चुना और आज अमरूद की खेती से करोड़ों रुपये के कारोबार की संभावना तैयार कर ली है।

कौन हैं यह सफल युवा किसान?

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के आमदौर गांव निवासी प्रखर प्रशांत पांडेय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से M.Com की पढ़ाई पूरी की है। पढ़ाई के बाद उन्होंने पारंपरिक नौकरी की राह नहीं चुनी, बल्कि खेती और बागवानी में अपना भविष्य तलाशा।

प्रखर का कहना है कि उन्हें बचपन से ही खेती में रुचि थी। उनके परिवार में पहले से बागवानी की जाती थी, लेकिन उन्होंने इसे आधुनिक तकनीक और नई किस्मों के साथ एक नया आयाम दिया।

अमरूद की तीन विशेष किस्मों की कर रहे खेती

प्रखर अपने बगीचे में अमरूद की तीन उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों की खेती कर रहे हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग है।

  • KG1 (BNR) अमरूद
  • थाई पिंक अमरूद (Thai Pink Guava)
  • रेड डायमंड अमरूद (Red Diamond Guava)

इन किस्मों के फलों का आकार, स्वाद और बाजार मूल्य सामान्य अमरूद की तुलना में काफी बेहतर होता है। यही वजह है कि इन्हें अच्छे दाम पर बेचा जा सकता है।

2000 अमरूद के पेड़ों से करोड़ों का कारोबार

प्रखर के बाग में लगभग 2000 अमरूद के पेड़ लगे हुए हैं। उनके अनुसार यदि एक पेड़ की उचित देखभाल की जाए तो उससे सालाना करीब 100 किलोग्राम तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

आय का गणित

  • एक पेड़ से उत्पादन: 100 किलोग्राम
  • अमरूद का औसत बाजार मूल्य: 60 रुपये प्रति किलोग्राम
  • एक पेड़ से संभावित आय: 6,000 रुपये
  • 2000 पेड़ों से संभावित टर्नओवर: 1,20,00,000 रुपये

यानी केवल अमरूद की खेती से लगभग 1.2 करोड़ रुपये तक का वार्षिक टर्नओवर संभव है।

आधुनिक तकनीक का कर रहे उपयोग

उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने और फलों को सुरक्षित रखने के लिए प्रखर आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने अहमदाबाद से विशेष बैग और फलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सामग्री मंगवाई है, जिससे फलों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।

कई लोगों को दे रहे रोजगार

प्रखर की बागवानी केवल उनकी आय का साधन नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार का भी एक बड़ा स्रोत बन चुकी है।

उनके बगीचे में निम्न कार्यों के लिए स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है—

  • निराई-गुड़ाई
  • फल तुड़ाई
  • पैकिंग
  • मार्केटिंग
  • परिवहन कार्य
  • ई-रिक्शा संचालन

इस प्रकार उनकी खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान दे रही है।

युवाओं के लिए दिया खास संदेश

प्रखर का मानना है कि यदि युवा आधुनिक खेती और बागवानी को व्यवसाय के रूप में अपनाएं तो वे अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। उनका सपना खुद नौकरी करने की बजाय दूसरों को रोजगार देना है और वे इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

जिला उद्यान अधिकारी ने भी की सराहना

बलिया की जिला उद्यान अधिकारी अल्का श्रीवास्तव ने प्रखर की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बागवानी युवाओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है।

उन्होंने बताया कि कम लागत और अपेक्षाकृत कम मेहनत में किसान बागवानी के माध्यम से बेहतर लाभ कमा सकते हैं। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

क्यों बढ़ रहा है अमरूद की खेती का क्रेज?

भारत में अमरूद की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके प्रमुख कारण हैं—

  • स्वास्थ्य के लिए लाभकारी फल
  • बाजार में अच्छी कीमत
  • कम समय में उत्पादन
  • लंबे समय तक फल देने वाले पौधे
  • प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में बढ़ती मांग

इसी वजह से अब कई युवा किसान पारंपरिक खेती छोड़कर फल बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

निष्कर्ष

बलिया के युवा किसान प्रखर प्रशांत पांडेय ने यह साबित कर दिया है कि यदि खेती को आधुनिक तकनीक और व्यवसायिक दृष्टिकोण के साथ किया जाए तो यह किसी भी नौकरी से कम नहीं है। M.Com की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने अमरूद की उन्नत खेती अपनाकर न केवल करोड़ों रुपये के टर्नओवर की संभावना बनाई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। उनकी सफलता आज देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

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FAQ's

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक युवा किसान हैं जिन्होंने M.Com की पढ़ाई के बाद अमरूद की खेती शुरू की।

KG1 (BNR), Thai Pink Guava और Red Diamond Guava।

करीब 2000 अमरूद के पेड़ लगे हुए हैं।

लगभग 1.2 करोड़ रुपये तक का वार्षिक टर्नओवर संभव बताया गया है।

हाँ, बागवानी से कई स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

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