CBSE Marking System 2026: क्यों हो रही है इतनी चर्चा?

  • On: June 4, 2026
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CBSE 2026 रिजल्ट और OSM ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जुड़े विवाद और मार्किंग बदलाव को दर्शाती तस्वीर

भारत के सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में से एक Central Board of Secondary Education (CBSE) हमेशा से अपने अपेक्षाकृत “उदार मूल्यांकन” के लिए जाना जाता रहा है। पिछले कई वर्षों में 95%–99% तक के स्कोर आम बात माने जाते थे, जिससे छात्रों को टॉप कॉलेजों में एडमिशन में फायदा मिलता था।

लेकिन 2026 के 12वीं रिजल्ट ने इस धारणा को पूरी तरह हिला दिया है।

CBSE 2026 रिजल्ट में क्या हुआ नया बदलाव?

इस साल CBSE 12वीं का पास प्रतिशत लगभग 85.20% रहा, जो पिछले कई सालों में सबसे कम माना जा रहा है। अचानक आई इस गिरावट ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों सभी को चौंका दिया।

मुख्य बदलाव:

  • औसत अंकों में गिरावट
  • टॉप स्कोरर्स की संख्या में कमी
  • कई विषयों में कठिन मार्किंग

OSM (On-Screen Marking) सिस्टम क्या है?

इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है OSM यानी On-Screen Marking सिस्टम

इस सिस्टम में:

  • उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन करके डिजिटल रूप में दी जाती हैं
  • शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर जांच करते हैं
  • पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का दावा किया जाता है

OSM सिस्टम से क्यों बढ़ी समस्याएं?

हालांकि सिस्टम को बेहतर और आधुनिक बनाने के लिए लागू किया गया था, लेकिन कई समस्याएं सामने आईं:

1. तकनीकी दिक्कतें

स्कैनिंग और अपलोडिंग में कई बार गलतियां हुईं।

2. प्रशिक्षण की कमी

शिक्षकों को नए सिस्टम की पूरी ट्रेनिंग नहीं मिल पाई।

3. मूल्यांकन में भ्रम

डिजिटल स्क्रीन पर कॉपियां जांचने में गलती की संभावना बढ़ गई।

4. रिजल्ट में असंगतता

कई छात्रों ने शिकायत की कि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले।


री-चेकिंग में सामने आई बड़ी गड़बड़ियां

रिजल्ट आने के बाद जब छात्रों ने री-चेकिंग के लिए आवेदन किया तो:

  • कई मामलों में गलत आंसर शीट दी गई
  • रोल नंबर और कॉपी का मिलान नहीं हुआ
  • कुछ जगहों पर डेटा मिसमैच भी पाया गया

इससे CBSE की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।


छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?

कम अंक आने का असर सीधे छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है:

1. कॉलेज एडमिशन पर प्रभाव

हालांकि अब ज्यादातर एडमिशन CUET के जरिए होते हैं, लेकिन 12वीं के अंक अब भी कई जगह अहम हैं।

2. Delhi University में असर

DU जैसे संस्थानों में टाई-ब्रेकर या सीट मैनेजमेंट में 12वीं के अंक अभी भी भूमिका निभाते हैं।

3. स्कॉलरशिप और कट-ऑफ

कई स्कॉलरशिप और संस्थानों की कट-ऑफ पर असर पड़ सकता है।

क्या CBSE का “लीनियंट” इमेज बदल रहा है?

पहले CBSE को एक ऐसे बोर्ड के रूप में देखा जाता था जो:

  • ज्यादा अंक देता था
  • छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाता था
  • हाई कट-ऑफ में मदद करता था

लेकिन अब OSM और सख्त मूल्यांकन के कारण यह छवि बदलती दिख रही है।


क्या वाकई नंबर देना कम कर दिया गया है?

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • नंबर कम नहीं किए गए
  • बल्कि मूल्यांकन अधिक सटीक और सख्त हुआ है
  • डिजिटल सिस्टम ने गलती की संभावना कम कर दी है, लेकिन शुरुआती चरण में तकनीकी दिक्कतें आईं

निष्कर्ष

CBSE का नया OSM सिस्टम एक बड़ा तकनीकी बदलाव है, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाना है। हालांकि शुरुआती दौर में समस्याएं और विवाद सामने आए हैं, लेकिन भविष्य में यह सिस्टम सुधार के साथ अधिक प्रभावी हो सकता है।

छात्रों के लिए जरूरी है कि वे केवल अंकों पर निर्भर न रहें, बल्कि CUET और स्किल-बेस्ड तैयारी पर भी ध्यान दें।

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FAQ's

OSM (On-Screen Marking) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचा जाता है।

इस साल OSM सिस्टम, तकनीकी दिक्कतों और मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव के कारण औसत अंकों में गिरावट देखी गई।

नहीं, विशेषज्ञों के अनुसार नंबर कम नहीं किए गए बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक सख्त और डिजिटल हो गई है।

हां, कुछ संस्थानों और टाई-ब्रेकर स्थितियों में 12वीं के अंक अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

नहीं, सिस्टम उद्देश्य के अनुसार पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बनाया गया है, लेकिन शुरुआती चरण में तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं।

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