इंद्रेश उपाध्याय के प्रेरक विचार : जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए इंद्रेश उपाध्याय के ये प्रेरक विचार

  • On: December 8, 2025
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इंद्रेश उपाध्याय के प्रेरक विचार | शांति, सफलता और संतुष्टि के लिए मोटिवेशनल कोट्स

इंद्रेश उपाध्याय के प्रेरक विचार : योगी और जीवनदर्शन के ज्ञाता हैं। उनका जन्म 7 अगस्त 1997 को वृंदावन धाम में हुआ था और वह कृष्णचंद शास्त्री ठाकुर के पुत्र हैं। इंद्रेश उपाध्याय का जीवन प्रेरणा से भरा हुआ है और उनकी शिक्षाएँ लाखों लोगों के दिलों में सकारात्मक ऊर्जा भर देती हैं। वह अपने विचारों और उपदेशों से समाज को जागरूक करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

आज हम उनके कुछ प्रेरक विचारों को साझा करेंगे, जो न केवल जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए प्रेरित करेंगे, बल्कि आपके अंदर की छिपी हुई शक्ति को भी उजागर करेंगे। तो आइए जानते हैं इंद्रेश उपाध्याय के कुछ अनमोल विचारों के बारे में:

1. समस्याओं के बीच शांति बनाए रखें

“जब चारों तरफ दिखने लगे समस्याएं, तो इंद्रेश उपाध्याय की ये बातें निकालेगी समाधान, आज ही घोल कर पी जाएं।”

इंद्रेश उपाध्याय कहते हैं कि जब जीवन में समस्याएं बुरी तरह से घेर लें, तो व्यक्ति को शांत और धैर्यवान रहना चाहिए। उन्हें विश्वास है कि जब व्यक्ति शांति से काम लेता है, तो हर समस्या का हल स्वतः ही सामने आता है। उन्होंने यह भी कहा कि, “यदि किसी व्यक्ति का कोई अपराध नहीं है, तो उसे चुप रहना चाहिए क्योंकि, सत्य का स्वभाव है कि वह अपने आप प्रकट हो जाता है।”

2. शांति पाने के लिए त्याग आवश्यक है

इंद्रेश उपाध्याय का मानना है कि शांति पाने के लिए जीवन में कुछ चीजों का त्याग करना बहुत जरूरी है। यह त्याग न केवल भौतिक वस्तुओं का हो सकता है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी हमें कुछ चीजों को छोड़ना पड़ता है, जैसे कि घमंड, ईर्ष्या और नफरत। त्याग से व्यक्ति अपने भीतर की शांति को महसूस करता है और जीवन में संतुलन बनाए रखता है।

3. स्वयं को बनाएं आकर्षक और प्रेरणादायक

“किसी को पाने के लिए स्वयं को मत तड़पाओ, बल्कि खुद को ऐसा बनाओ जिससे सामने वाला आपके लिए तड़पे।”

इंद्रेश उपाध्याय यह मानते हैं कि किसी और को आकर्षित करने के लिए हमें अपने व्यक्तित्व को सुधारना चाहिए। यह नहीं कि हम दूसरों की सराहना के लिए संघर्ष करें, बल्कि हमें खुद को ऐसा बनाना चाहिए कि लोग स्वयं हमारे साथ जुड़ना चाहें।

4. भगवान की इच्छा में राजी रहना

इंद्रेश उपाध्याय का यह भी कहना है कि हमें हमेशा भगवान की इच्छा में राजी रहना चाहिए। जीवन की कई स्थितियाँ हमें न चाहते हुए भी बदलनी पड़ती हैं, लेकिन जब हम भगवान के आदेश को स्वीकार करते हैं, तो हमारी यात्रा आसान और खुशहाल हो जाती है। इस प्रकार, व्यक्ति अपनी समस्याओं का समाधान सच्ची आस्था और विश्वास से पा सकता है।

5. संतुष्टि और प्रसन्नता का अभ्यास करें

“हर परिस्थिति में स्वयं को प्रसन्न रखना भी एक तपस्या है। इसलिए आपके पास जो है, जैसा है उसमें संतुष्ट रहना चाहिए।”

इंद्रेश उपाध्याय मानते हैं कि हम जो कुछ भी प्राप्त करते हैं, उसमें संतुष्ट रहना और प्रसन्न रहना चाहिए। यह किसी प्रकार का तपस्या जैसा होता है क्योंकि संतुष्टि के साथ जीने से व्यक्ति मानसिक शांति और स्थिरता पा सकता है।

6. किसी की गलती पर हीन भावना न रखें

इंद्रेश उपाध्याय का यह कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा कोई गलती की जाती है, तो हमें उसके प्रति हीन भावना नहीं रखनी चाहिए। हमें यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि क्या परिस्थिति रही होगी, जिससे वह गलती हुई। इस समझ से समस्याओं का समाधान आसानी से हो जाता है, और हम अपने दिल से नफरत और घृणा को दूर कर सकते हैं।

7. मन को जीतें, सब कुछ जीतें

“मन को जीतो, संसार अपना आप जीत जाओगे।”

इंद्रेश उपाध्याय का यह विचार बहुत शक्तिशाली है। वह मानते हैं कि अगर हम अपने मन को नियंत्रित कर लेते हैं और उसकी दिशा सही रख पाते हैं, तो हम जीवन में हर लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका स्वयं का मन होता है, और यदि हम उसे सही दिशा में मोड़ लें, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं।

8. राम का जो है, वही काम का है

“जो राम का है, वही काम का है।”

इंद्रेश उपाध्याय ने यह विचार भगवान राम से संबंधित बताया है। वह कहते हैं कि हमें अपने जीवन में वही कार्य करने चाहिए, जो हमें ईश्वर ने निर्धारित किया है। जो कार्य भगवान की इच्छा से मेल खाता है, वही असली काम है और वही सफलता की कुंजी है।

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निष्कर्ष

इंद्रेश उपाध्याय के इन विचारों में न केवल आध्यात्मिकता और धर्म का समावेश है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का भी संचार होता है। यदि हम इन विचारों को अपने जीवन में उतारें, तो न केवल हम समस्याओं से बाहर निकल पाएंगे, बल्कि एक खुशहाल और संतुष्ट जीवन भी जी सकेंगे।

इंद्रेश उपाध्याय के प्रेरक विचार हमें सिखाती हैं कि शांतिपूर्वक जीवन जीने के लिए हमें अपने अंदर की बुराइयों को छोड़ना होगा, आत्मविश्वास बनाए रखना होगा और हर परिस्थिति में ईश्वर के प्रति आस्था बनाए रखनी होगी।

Tags: Motivational Quotes, | Indresh Upadhyay, | Motivational Quotes, | Life Tips, | Peace, | Self-confidence, | Inspirational Quotes, | Self-improvement,
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FAQ's

The CMAT City Intimation Slip is a document released by the National Testing Agency (NTA) that tells candidates the city where their CMAT 2026 exam centre has been allotted. It helps candidates plan travel and stay before the exam day.

No. The city slip only shows the allotted exam city, whereas the CMAT admit card (released later) contains full details including the actual centre address, exam timings, reporting instructions, and entry requirements.

You can download it from the official CMAT website at cmat.nta.nic.in by logging in using your application number and date of birth (or password) once the city slip link is active.

No. Once the city is allotted and shown on the city slip, you cannot change it later. Any changes must have been done during the application or correction window before the city slip was released.

Note your allotted city and prepare travel plans if required.

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