खाड़ी युद्ध (Gulf War 1990–1991): कैसे शुरू हुआ, मुख्य खिलाड़ी और अमेरिका-ईरान का संबंध

  • On: March 9, 2026
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Gulf War 1990–1991 Operation Desert Storm US Coalition Forces Iraq Kuwait Conflict

खाड़ी युद्ध (1990–1991) आधुनिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य संघर्षों में से एक था। यह युद्ध तब शुरू हुआ जब इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने 2 अगस्त 1990 को कुवैत पर आक्रमण कर दिया। इस घटना ने पूरे विश्व को झकझोर दिया और शीत युद्ध के बाद पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय सैन्य कार्रवाई का कारण बना।

अमेरिका के नेतृत्व में 35 देशों के गठबंधन ने ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (Operation Desert Storm) शुरू किया और कुछ ही हफ्तों में कुवैत को इराकी कब्जे से मुक्त करा लिया। इस युद्ध ने मध्य पूर्व की राजनीति, तेल अर्थव्यवस्था और अमेरिका-ईरान संबंधों को लंबे समय तक प्रभावित किया।


खाड़ी युद्ध क्या था? (What is the Gulf War)

खाड़ी युद्ध 1990 से 1991 के बीच हुआ एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य संघर्ष था, जो इराक द्वारा कुवैत पर कब्जा करने के बाद शुरू हुआ।

संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से अमेरिका के नेतृत्व में एक बड़े सैन्य गठबंधन ने इराक के खिलाफ कार्रवाई की और कुवैत को मुक्त कराया।

यह युद्ध कई कारणों से ऐतिहासिक माना जाता है:

  • शीत युद्ध के बाद पहला बड़ा वैश्विक सैन्य संकट

  • आधुनिक तकनीक और “स्मार्ट बम” का बड़े पैमाने पर उपयोग

  • अमेरिका का वैश्विक सुपरपावर के रूप में उभरना


ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)

1. ईरान-इराक युद्ध के बाद आर्थिक संकट

1980 से 1988 तक चले ईरान-इराक युद्ध के बाद इराक आर्थिक रूप से कमजोर हो चुका था।

  • इराक पर लगभग 80 अरब डॉलर का कर्ज था

  • सेना बहुत बड़ी थी लेकिन देश की अर्थव्यवस्था कमजोर थी

इराक चाहता था कि कुवैत और सऊदी अरब उसके लगभग 30 अरब डॉलर के कर्ज को माफ कर दें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


2. तेल विवाद और आर्थिक तनाव

इराक ने कुवैत पर आरोप लगाया कि वह:

  • जरूरत से ज्यादा तेल उत्पादन कर रहा है

  • जिससे वैश्विक तेल कीमतें गिर रही हैं

  • और इराक की आय कम हो रही है

इसके अलावा इराक ने कुवैत पर रुमैला तेल क्षेत्र से स्लांट ड्रिलिंग करके तेल चोरी करने का आरोप लगाया।


3. कुवैत पर ऐतिहासिक दावा

सद्दाम हुसैन ने दावा किया कि कुवैत ऐतिहासिक रूप से इराक का हिस्सा था और ब्रिटिश शासन के दौरान इसे अलग किया गया था।


कुवैत पर इराक का आक्रमण (Invasion of Kuwait)

2 अगस्त 1990 को इराक ने लगभग 1 लाख सैनिकों के साथ कुवैत पर हमला कर दिया।

  • कुछ ही घंटों में कुवैत सिटी पर कब्जा हो गया

  • कुवैत की सरकार सऊदी अरब भाग गई

  • इराक ने कुवैत को अपना 19वां प्रांत घोषित कर दिया

इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने तुरंत हस्तक्षेप किया।


संयुक्त राष्ट्र की भूमिका (UN Response)

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कई प्रस्ताव पारित किए:

  • प्रस्ताव 660 – इराक से तुरंत कुवैत छोड़ने की मांग

  • प्रस्ताव 678 – यदि इराक पीछे नहीं हटता तो सैन्य कार्रवाई की अनुमति

इसी प्रस्ताव के आधार पर अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने सैन्य अभियान शुरू किया।


खाड़ी युद्ध के प्रमुख खिलाड़ी (Major Players in the Gulf War)

1. इराक

इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का लक्ष्य था:

  • कुवैत के तेल संसाधनों पर नियंत्रण

  • अरब दुनिया में नेतृत्व हासिल करना


2. संयुक्त राज्य अमेरिका

अमेरिका ने पूरे सैन्य गठबंधन का नेतृत्व किया।

उसने दो बड़े सैन्य अभियान शुरू किए:

  • ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड (1990) – सऊदी अरब की रक्षा के लिए सैनिक तैनाती

  • ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (1991) – इराक के खिलाफ सैन्य हमला


3. अंतरराष्ट्रीय गठबंधन

अमेरिका के साथ 35 देशों ने इस अभियान में भाग लिया, जिनमें शामिल थे:

  • ब्रिटेन

  • फ्रांस

  • सऊदी अरब

  • मिस्र

इन देशों ने इराक के विस्तार को रोकने के लिए संयुक्त कार्रवाई की।


ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (Operation Desert Storm)

जनवरी 1991 में गठबंधन सेनाओं ने डेजर्ट स्टॉर्म शुरू किया।

हवाई हमला

  • लगभग 42 दिन तक हवाई बमबारी

  • इराक की सैन्य संरचना और संचार व्यवस्था नष्ट

जमीनी युद्ध

  • फरवरी 1991 में जमीनी हमला

  • केवल 100 घंटे में इराकी सेना पराजित

28 फरवरी 1991 को युद्ध समाप्त हो गया और कुवैत को आजादी मिल गई।


खाड़ी युद्ध में अमेरिका की रणनीति

अमेरिका की भागीदारी केवल कुवैत की रक्षा तक सीमित नहीं थी। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण थे।

1. ऊर्जा सुरक्षा

मध्य पूर्व विश्व के सबसे बड़े तेल भंडार का केंद्र है।
कुवैत और सऊदी अरब की सुरक्षा वैश्विक तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण थी।

2. नई विश्व व्यवस्था (New World Order)

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने इसे नई वैश्विक व्यवस्था की शुरुआत बताया।

3. सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

इस युद्ध में अमेरिका ने पहली बार बड़े पैमाने पर:

  • स्मार्ट बम

  • सैटेलाइट तकनीक

  • आधुनिक वायु शक्ति

का उपयोग किया।


खाड़ी युद्ध में ईरान की भूमिका

ईरान इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं हुआ, लेकिन उसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

तटस्थ नीति

ईरान और इराक पहले ही 8 साल तक युद्ध लड़ चुके थे, इसलिए ईरान ने तटस्थ रहने का फैसला किया।

शरणार्थी संकट

युद्ध के दौरान:

  • हजारों इराकी और कुवैती नागरिक

  • ईरान में शरण लेने पहुंचे

इराकी विमानों का मामला

युद्ध के दौरान कई इराकी पायलट अपने विमान ईरान में सुरक्षित रखने के लिए लेकर भाग गए।
बाद में ईरान ने इन विमानों को वापस नहीं किया।

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अमेरिका और ईरान का संबंध

खाड़ी युद्ध ने अमेरिका-ईरान संबंधों को और जटिल बना दिया।

1. ईरान-इराक युद्ध में अमेरिकी समर्थन

1980 के दशक में अमेरिका ने इराक को:

  • खुफिया जानकारी

  • आर्थिक सहायता

दी ताकि ईरान युद्ध में जीत न सके।

2. नीति में बदलाव

1990 के दशक में अमेरिका ने Dual Containment Policy अपनाई।

इसका मतलब था:

  • ईरान और इराक दोनों को कमजोर रखना

  • ताकि कोई भी क्षेत्रीय शक्ति न बन सके


खाड़ी युद्ध के प्रभाव (Impact of the Gulf War)

खाड़ी युद्ध के परिणाम दूरगामी थे।

1. अमेरिका की वैश्विक शक्ति बढ़ी

शीत युद्ध के बाद अमेरिका एकमात्र सुपरपावर बनकर उभरा।

2. मध्य पूर्व में अस्थिरता

इस युद्ध के बाद:

  • इराक पर लंबे समय तक प्रतिबंध लगे

  • क्षेत्रीय राजनीति और तनाव बढ़ गया

3. 2003 के इराक युद्ध की पृष्ठभूमि

खाड़ी युद्ध ने बाद में 2003 के इराक युद्ध और सद्दाम हुसैन के पतन का रास्ता तैयार किया।


निष्कर्ष

खाड़ी युद्ध केवल कुवैत की मुक्ति का युद्ध नहीं था, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, तेल अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन को बदलने वाली ऐतिहासिक घटना थी।

इस संघर्ष ने अमेरिका की सैन्य शक्ति को स्थापित किया और अमेरिका-ईरान संबंधों में नई जटिलताएँ पैदा कीं। आज भी मध्य पूर्व में चल रहे कई संघर्षों की जड़ें इसी युद्ध में देखी जाती हैं।

Tags: World History GK, | Gulf War 1991, | Gulf War 1990, | Iraq Kuwait War, | US Iran Relations, | United Nations Resolution 678, | Modern Warfare History,
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