February 17, 2026 • Updated 4 day ago

Success Story: पति-पत्नी ने बनाए ‘मंत्र बोलने वाले खिलौने’, स्टार्टअप से हर महीने कमा रहे ₹1.5 करोड़

मंत्र बोलने वाले खिलौने Panda’s Box की सफलता कहानी, स्क्रीन-फ्री बच्चों के सांस्कृतिक खिलौने

आज के समय में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम लगभग हर माता-पिता की चिंता बन चुका है। मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों को शांत रखने का आसान तरीका जरूर बन गए हैं, लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी उतने ही गंभीर हैं। कम होती शारीरिक गतिविधि, ध्यान में कमी, आंखों की परेशानी और परिवार से दूरी—ये सब समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

इसी चिंता से जन्म हुआ एक ऐसे स्टार्टअप का, जिसने बच्चों को स्क्रीन से दूर रखते हुए भारतीय संस्कृति से जोड़ने का अनोखा रास्ता खोज निकाला। यह कहानी है Panda’s Box की, जिसे पति-पत्नी सुकृति और रजत मेंदिरत्ता ने मिलकर शुरू किया।


स्क्रीन टाइम की चिंता से जन्मा आइडिया

सुकृति और रजत दोनों वर्किंग पैरेंट्स हैं। वे चाहते थे कि उनका बेटा भी वही संस्कार, कहानियां और मंत्र सुने, जो उन्होंने अपने बचपन में परिवार के साथ सीखे थे।

लेकिन जब उन्होंने बाजार में विकल्प तलाशे, तो निराशा हाथ लगी—

  • ज्यादातर प्रोडक्ट्स स्क्रीन आधारित थे।

  • खिलौने सिर्फ तेज रोशनी और शोर तक सीमित थे।

  • भारतीय संस्कृति और भावनात्मक जुड़ाव की कमी थी।

तभी उनके मन में सवाल आया—क्या बच्चों को बिना मोबाइल के, शांत और सरल तरीके से भारतीय संस्कृति से जोड़ा जा सकता है?


अप्रैल 2022: Panda’s Box की शुरुआत

अप्रैल 2022 में इस विचार ने वास्तविक रूप लिया। सुकृति ने अपने कॉर्पोरेट करियर का अनुभव इस स्टार्टअप में लगाया। उनके पास 15 साल से अधिक का ब्रांड और मार्केटिंग अनुभव था। उन्होंने बड़ी कंपनियों में काम किया था और बाजार की समझ रखती थीं।

वहीं रजत मेंदिरत्ता ने ऑपरेशंस और सप्लाई चेन की जिम्मेदारी संभाली। वे पहले विभिन्न कंपनियों में नेतृत्व की भूमिका निभा चुके थे।

दोनों ने मिलकर तय किया कि वे ऐसा प्रोडक्ट बनाएंगे जो—

  • स्क्रीन-फ्री हो

  • बच्चों को भारतीय मंत्र और कहानियों से जोड़े

  • माता-पिता के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद हो


क्या है खास इन ‘मंत्र बोलने वाले खिलौनों’ में?

Panda’s Box ने बाजार में मंत्र बोलने वाले प्लश टॉय (Soft Toys) पेश किए।

इन खिलौनों की खासियत:

  • हल्की और शांत ध्वनि

  • सरल और आकर्षक डिजाइन

  • सोने से पहले मंत्र या कहानी सुनाने की सुविधा

  • बच्चों के लिए सुरक्षित सामग्री

धीरे-धीरे बच्चों ने इन्हें अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। कई बच्चे इन खिलौनों की आवाज सुनते-सुनते सो जाते हैं।


शुरुआती संघर्ष: आसान नहीं था सफर

भारतीय सॉफ्ट टॉय इंडस्ट्री काफी बिखरी हुई है।

  • छोटे कारीगर बड़े ऑर्डर नहीं संभाल पाते।

  • बड़े निर्माता छोटे ऑर्डर में रुचि नहीं लेते।

  • नई कैटेगरी का प्रोडक्ट होने से जोखिम ज्यादा था।

करीब छह महीने तक लगातार प्रयास, अस्वीकृति और ट्रायल के बाद उन्हें सही वेंडर मिला।

सबसे बड़ा डर था—क्या माता-पिता इस नए कॉन्सेप्ट को समझ पाएंगे?

लेकिन जब पहले प्रोडक्ट ग्राहकों तक पहुंचे, तो प्रतिक्रिया उम्मीद से बेहतर रही।


कैसे बढ़ी पहचान?

Panda’s Box ने जल्दबाजी में विस्तार नहीं किया।

  • माता-पिता का फीडबैक लिया गया

  • सुझावों को नई प्रोडक्ट लाइन में शामिल किया गया

  • प्लश टॉय के साथ म्यूजिकल बुक्स और स्टोरीटेलिंग किट्स लॉन्च की गईं

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और क्विक-कॉमर्स ऐप्स के जरिए ब्रांड देशभर में पहुंचा। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon से जुड़ने के बाद इसकी पहुंच और तेज हुई।

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Shark Tank India से मिली राष्ट्रीय पहचान

स्टार्टअप के सफर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब Panda’s Box को Shark Tank India में अपनी प्रस्तुति देने का मौका मिला।

इस मंच ने ब्रांड को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। हालांकि सुकृति और रजत के लिए असली उपलब्धि टीवी पर आना नहीं, बल्कि लाखों परिवारों तक पहुंचना था।


आज की सफलता

  • 2 लाख से ज्यादा बच्चे इन प्रोडक्ट्स से जुड़ चुके हैं

  • हर महीने लगभग ₹1.5 करोड़ की कमाई

  • हजारों सकारात्मक ग्राहक अनुभव

  • लगातार बढ़ती मांग

यह सफलता इस बात का संकेत है कि माता-पिता आज स्क्रीन-फ्री और वैल्यू-बेस्ड विकल्प तलाश रहे हैं।


इस स्टार्टअप से क्या सीख मिलती है?

  1. समस्या पहचानें – स्क्रीन टाइम जैसी वास्तविक समस्या से समाधान निकला।

  2. व्यक्तिगत अनुभव भी बिजनेस आइडिया बन सकता है।

  3. फीडबैक पर काम करना ही असली ग्रोथ है।

  4. संस्कृति और आधुनिक जरूरतों का संतुलन सफलता दिला सकता है।


निष्कर्ष

आज जब हर घर में मोबाइल और टीवी का दखल बढ़ रहा है, ऐसे में Panda’s Box जैसे प्रयास यह याद दिलाते हैं कि बच्चों को संस्कार सिखाने के लिए बड़े साधनों की जरूरत नहीं होती।

कभी-कभी एक सॉफ्ट टॉय, एक मधुर मंत्र और एक छोटी-सी कहानी ही बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ सकती है।

यह कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप की नहीं, बल्कि उन माता-पिता की है जो अपने बच्चों के लिए बेहतर और संतुलित भविष्य चाहते हैं।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: February 17, 2026

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