2050 तक ‘आलसी’ हो सकते हैं भारतीय! बढ़ती गर्मी से हार्ट अटैक और डायबिटीज का खतरा बढ़ने की चेतावनी

  • On: March 23, 2026
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भारत में हर साल गर्मी का स्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है। आपने भी महसूस किया होगा कि पहले की तुलना में अब गर्मियां ज्यादा लंबी और ज्यादा तीखी हो गई हैं। पहले जहां हर मौसम लगभग 3–4 महीने तक चलता था, वहीं अब गर्मी का असर साल के अधिक हिस्से में महसूस होने लगा है।

इसी बढ़ती गर्मी को लेकर मेडिकल जर्नल लैंसेट (The Lancet) की एक नई स्टडी ने गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार अगर जलवायु परिवर्तन की यही रफ्तार जारी रही तो साल 2050 तक भारत में शारीरिक गतिविधियां कम हो सकती हैं, जिससे लोग अधिक “आलसी” जीवनशैली की ओर बढ़ेंगे। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा और हार्ट अटैक, डायबिटीज और अन्य गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।


क्या कहती है लैंसेट की रिपोर्ट?

लैंसेट की स्टडी में दुनिया के 156 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार यदि किसी महीने का औसत तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है तो लोगों की बाहरी शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो जाती हैं।

ऐसे मौसम में लोग व्यायाम, वॉक, खेल या अन्य आउटडोर एक्टिविटी करने से बचते हैं और अधिक समय घर के अंदर बिताने लगते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में गर्मी की तीव्रता बढ़ेगी, जिससे लोगों की फिजिकल एक्टिविटी में गिरावट देखी जा सकती है।


क्यों कम हो सकती है लोगों की शारीरिक गतिविधि?

बढ़ती गर्मी कई कारणों से लोगों को निष्क्रिय बना सकती है, जैसे:

  • तेज गर्मी में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है
  • हीटवेव के कारण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है
  • लोग घरों में एसी या कूलर के साथ ज्यादा समय बिताने लगते हैं
  • व्यायाम और आउटडोर खेलों में कमी आती है

इस वजह से धीरे-धीरे सक्रिय जीवनशैली की जगह बैठकर रहने वाली जीवनशैली बढ़ सकती है।


किन बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते, उनमें कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

1. हार्ट अटैक

कम शारीरिक गतिविधि और मोटापा दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ा देते हैं।

2. डायबिटीज

निष्क्रिय जीवनशैली और वजन बढ़ने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

3. हाई ब्लड प्रेशर

शारीरिक गतिविधि की कमी से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है।

4. मोटापा

कम एक्टिविटी और ज्यादा कैलोरी सेवन से वजन तेजी से बढ़ सकता है।

5. मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं

घर के अंदर ज्यादा समय बिताने से तनाव, चिंता और अवसाद का खतरा भी बढ़ सकता है।

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भारत पर क्यों ज्यादा असर पड़ सकता है?

भारत उन देशों में शामिल है जहां पहले से ही गर्मी और हीटवेव की समस्या तेजी से बढ़ रही है।

इसके अलावा:

  • बड़ी आबादी खुले वातावरण में काम करती है
  • शहरी क्षेत्रों में हीट आइलैंड प्रभाव ज्यादा है
  • पार्क और खुले स्थान कम होते जा रहे हैं

इन कारणों से भारत में जलवायु परिवर्तन का असर स्वास्थ्य पर ज्यादा गंभीर हो सकता है।


खुद को कैसे रखें एक्टिव?

भले ही तापमान बढ़ रहा हो, लेकिन कुछ उपाय अपनाकर आप अपनी शारीरिक गतिविधि बनाए रख सकते हैं।

  • सुबह या शाम के समय वॉक करें
  • घर के अंदर योग या एक्सरसाइज करें
  • पर्याप्त पानी पिएं
  • हल्का और पौष्टिक भोजन करें
  • अत्यधिक गर्मी में बाहर निकलने से बचें

निष्कर्ष

जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण की समस्या नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। लैंसेट की स्टडी यह संकेत देती है कि अगर अभी से सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले दशकों में बढ़ती गर्मी लोगों की जीवनशैली को बदल सकती है और गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।

इसलिए जरूरी है कि हम स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, नियमित व्यायाम करें और जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास करें

Tags: Climate Change, | Heat Wave India, | Lancet Study, | Heart Attack Risk, | Global Warming, | Diabetes Risk,
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