March 19, 2026 • Updated 20 day ago

नागोया प्रोटोकॉल क्या है? उद्देश्य, प्रमुख विशेषताएँ और भारत की पहली कार्यान्वयन रिपोर्ट

Nagoya Protocol objectives features and India first national report on implementation explained

नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol) एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा है, जिसका उद्देश्य जैविक संसाधनों (Genetic Resources) के उपयोग से प्राप्त लाभों का न्यायसंगत और समान वितरण (Access and Benefit Sharing – ABS) सुनिश्चित करना है। यह समझौता Convention on Biological Diversity (CBD) के तहत बनाया गया है, जिसे 1992 में अपनाया गया था। इसका मुख्य लक्ष्य जैव विविधता की सुरक्षा करना, पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित रखना और वैज्ञानिक अनुसंधान को नैतिक रूप से बढ़ावा देना है।

नागोया प्रोटोकॉल विशेष रूप से जैविक संसाधनों जैसे पौधे, जानवर और सूक्ष्मजीव तथा उनसे जुड़े स्थानीय और आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि जब कोई संस्था या देश इन संसाधनों का उपयोग करे, तो उससे मिलने वाले आर्थिक या तकनीकी लाभ का उचित हिस्सा संसाधन प्रदान करने वाले समुदाय या देश को मिले।

नवीनतम अपडेट: भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR1)

हाल ही में Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC) ने नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR1) Convention on Biological Diversity (CBD) के सचिवालय को प्रस्तुत की है।

यह रिपोर्ट 2017 से 2025 की अवधि को कवर करती है और इससे पता चलता है कि Access and Benefit Sharing (ABS) के क्षेत्र में भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

इस रिपोर्ट में जैविक संसाधनों के उपयोग, पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और बायोपायरेसी (Biopiracy) को रोकने के लिए किए गए प्रयासों को विस्तार से बताया गया है।

नागोया प्रोटोकॉल के मुख्य उद्देश्य

नागोया प्रोटोकॉल के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. जैविक संसाधनों से प्राप्त लाभों का समान वितरण सुनिश्चित करना।

  2. स्थानीय और आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा करना।

  3. जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ावा देना।

  4. वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को नैतिक और पारदर्शी बनाना।

  5. बायोपायरेसी को रोकना और संसाधनों के दुरुपयोग को नियंत्रित करना।


नागोया प्रोटोकॉल के प्रमुख सिद्धांत

1. Access and Benefit Sharing (ABS)

यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि किसी देश या समुदाय के जैविक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभ का उचित हिस्सा उसी देश या समुदाय को मिले।

2. Genetic Resources

Genetic Resources ऐसे जैविक संसाधन होते हैं जिनमें वंशानुगत इकाइयाँ (heredity units) होती हैं, जैसे:

  • पौधे

  • जानवर

  • सूक्ष्मजीव

3. Traditional Knowledge

स्थानीय या आदिवासी समुदायों द्वारा पीढ़ियों से संचित ज्ञान, जैसे औषधीय पौधों का उपयोग या प्राकृतिक संसाधनों का पारंपरिक प्रबंधन।


नागोया प्रोटोकॉल की प्रमुख विशेषताएँ

नागोया प्रोटोकॉल तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है:

1. Access Obligations

  • सदस्य देशों को संसाधनों तक पहुँच के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाने होते हैं।

  • किसी भी देश को जैविक संसाधन उपयोग करने से पहले Prior Informed Consent (PIC) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।

2. Benefit-Sharing Obligations

  • संसाधनों से प्राप्त लाभों का उचित वितरण सुनिश्चित किया जाता है।

  • लाभ दो प्रकार के हो सकते हैं:

    • मौद्रिक लाभ: रॉयल्टी, लाइसेंस शुल्क

    • गैर-मौद्रिक लाभ: तकनीक हस्तांतरण, प्रशिक्षण या शोध सहयोग

  • यह सब Mutually Agreed Terms (MAT) के आधार पर तय होता है।

3. Compliance Obligations

  • सदस्य देशों को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके देश में उपयोग किए जा रहे जैविक संसाधन कानूनी रूप से प्राप्त किए गए हों।

  • इसके लिए निगरानी तंत्र और चेकपॉइंट्स बनाए जाते हैं।

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भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

भारत द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ सामने आई हैं:

  • देशभर में 2,76,653 से अधिक Biodiversity Management Committees (BMCs) स्थापित की गई हैं।

  • भारत ने 3,556 Internationally Recognized Certificates of Compliance (IRCCs) जारी किए हैं, जो वैश्विक कुल का 60% से अधिक हैं।

  • ₹216.31 करोड़ से अधिक धनराशि Access and Benefit Sharing के माध्यम से जुटाई गई।

  • इस धन का बड़ा हिस्सा स्थानीय समुदायों, किसानों और पारंपरिक ज्ञान धारकों को प्रदान किया गया।

  • Biological Diversity Rules, 2024 और ABS Regulations, 2025 के सफल कार्यान्वयन को भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है।


नागोया प्रोटोकॉल का महत्व

नागोया प्रोटोकॉल वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह:

  • जैविक संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग को बढ़ावा देता है

  • स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा करता है

  • जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास में योगदान देता है

  • बायोपायरेसी को रोकने में मदद करता है


निष्कर्ष

नागोया प्रोटोकॉल एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता है जो जैविक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों के न्यायपूर्ण और समान वितरण को सुनिश्चित करता है। भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट यह दर्शाती है कि देश ने Access and Benefit Sharing (ABS) के क्षेत्र में मजबूत ढांचा विकसित किया है।

यह पहल न केवल जैव विविधता की सुरक्षा करती है बल्कि स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भी वैश्विक स्तर पर सम्मान और संरक्षण प्रदान करती है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: March 19, 2026

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