January 16, 2026 • Updated 1 month ago

मलयालम भाषा विधेयक 2025: प्रमुख प्रावधान, प्रभाव और विवाद

Kerala government passes Malayalam Language Bill 2025 making Malayalam the sole official language, education and administration impact

भाषा भारत में केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि पहचान, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। इसी संदर्भ में अक्टूबर 2025 में केरल की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने मलयालम भाषा विधेयक, 2025 को केरल विधानसभा में पेश किया और पारित किया। इस विधेयक का उद्देश्य मलयालम को केरल राज्य की एकमात्र आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित करना है।

हालाँकि सरकार का दावा है कि यह विधेयक भाषा को प्रोत्साहित करता है, न कि थोपता, लेकिन इसे लेकर कर्नाटक सरकार और भाषाई अल्पसंख्यकों ने गंभीर आपत्तियाँ जताई हैं, विशेषकर कासरगोड जिले में कन्नड़ भाषियों के अधिकारों को लेकर।

मलयालम भाषा विधेयक 2025 क्या है?

मलयालम भाषा विधेयक 2025 का उद्देश्य राज्य प्रशासन, शिक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में अंग्रेज़ी पर निर्भरता कम कर मलयालम को प्राथमिक और एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे आम नागरिकों के लिए शासन व्यवस्था अधिक सुलभ और पारदर्शी बनेगी।

मलयालम भाषा विधेयक 2025 के प्रमुख प्रावधान

1. मलयालम को एकमात्र आधिकारिक भाषा का दर्जा

विधेयक के अनुसार:

  • सभी सरकारी आदेश, अधिसूचनाएँ, परिपत्र और पत्राचार केवल मलयालम में होंगे
  • अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं का आधिकारिक उपयोग समाप्त किया जाएगा

2. शिक्षा में अनिवार्य मलयालम

  • कक्षा 1 से कक्षा 10 तक मलयालम अनिवार्य विषय होगा
  • उद्देश्य: नई पीढ़ी में भाषा और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

3. न्याय व्यवस्था में स्थानीय भाषा

  • जिला और सत्र न्यायालयों में मलयालम को आधिकारिक भाषा बनाया जाएगा
  • केंद्रीय और राज्य कानूनों का मलयालम में अनुवाद किया जाएगा, ताकि आम नागरिक कानून को समझ सकें

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4. डिजिटल युग के लिए भाषा का आधुनिकीकरण

  • विधेयक का एक अहम हिस्सा डिजिटल विकास है:
  • मलयालम में ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर
  • AI और ई-गवर्नेंस टूल्स का विकास
  • सरकारी वेबसाइट और मोबाइल ऐप्स को मूल रूप से मलयालम में विकसित करना

5. भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षा प्रावधान

  • कन्नड़ और तमिल भाषी समुदायों के लिए विशेष सुरक्षा क्लॉज
  • अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा का दावा

6. संवैधानिक और कानूनी संतुलन

  • यह विधेयक शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2005 और
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप बताया गया है

कर्नाटक सरकार की आपत्ति क्यों?

कर्नाटक सरकार ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है, क्योंकि:

  • कासरगोड जिले में बड़ी संख्या में कन्नड़ भाषी आबादी रहती है
  • आशंका है कि शिक्षा और प्रशासन में मलयालम अनिवार्य होने से
  1. अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे
  • यह अनुच्छेद 29 और 30 (भाषाई अल्पसंख्यक अधिकार) का उल्लंघन हो सकता है

केरल सरकार का पक्ष

केरल के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि:

  • यह विधेयक भाषा थोपने के लिए नहीं, बल्कि संवर्धन और संरक्षण के लिए है
  • अल्पसंख्यकों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे
  • 2017 में राष्ट्रपति द्वारा अस्वीकृत विधेयक की कमियों को 2025 संस्करण में दूर किया गया है

2017 के विधेयक से क्या अलग है?

बिंदु 2017 विधेयक 2025 विधेयक
राष्ट्रपति की मंजूरी अस्वीकृत कानूनी आपत्तियों को संबोधित
अल्पसंख्यक सुरक्षा अस्पष्ट स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान
डिजिटल भाषा नहीं AI और e-Governance पर फोकस

मलयालम भाषा विधेयक 2025 का संभावित प्रभाव

सकारात्मक प्रभाव

  • स्थानीय लोगों के लिए प्रशासन आसान
  • सांस्कृतिक पहचान को मजबूती
  • डिजिटल समावेशन में वृद्धि

चुनौतियाँ

  • अंतर-राज्यीय भाषाई तनाव
  • अल्पसंख्यक अधिकारों पर कानूनी बहस
  • अंग्रेज़ी आधारित शिक्षा प्रणाली से संक्रमण

निष्कर्ष

मलयालम भाषा विधेयक 2025 केरल की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार भाषाई विविधता और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है। आने वाले समय में यह विधेयक भारत में भाषा आधारित नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: January 16, 2026

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