February 21, 2026 • Updated 19 hour ago

Zero Hour क्या है? भारतीय संसद की अनोखी संसदीय परंपरा

Lok Sabha में Zero Hour के दौरान सांसद महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए

भारतीय लोकतंत्र में Zero Hour एक अनोखी संसदीय परंपरा है, जिसका उल्लेख न तो संविधान में है और न ही संसद की कार्यवाही के नियमों में। फिर भी, यह संसद की सबसे प्रभावशाली और सक्रिय प्रक्रियाओं में से एक मानी जाती है।

जब सांसदों (MPs) को लगा कि कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दे तुरंत उठाए जाने चाहिए, तब इस परंपरा की शुरुआत हुई। आइए विस्तार से समझते हैं कि ज़ीरो आवर क्या है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और यह क्यों महत्वपूर्ण है।


🏛 Zero Hour क्या है?

Zero Hour वह समय होता है जब सांसद बिना पूर्व निर्धारित एजेंडा के तात्कालिक और महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाते हैं।

यह Question Hour (प्रश्नकाल) के तुरंत बाद शुरू होता है। हालांकि प्रश्नकाल संसद की आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा है, लेकिन Zero Hour नियम पुस्तिका में दर्ज नहीं है — यह एक विकसित परंपरा है।


🕒 संसद में Zero Hour का समय

1️⃣ Lok Sabha (लोकसभा)

  • प्रश्नकाल के तुरंत बाद, लगभग 12:00 बजे शुरू

  • अवधि: सामान्यतः 30 मिनट से 1 घंटा (लंच ब्रेक तक)

  • शर्त: सांसदों को उसी दिन सुबह 10:00 बजे से पहले स्पीकर को सूचना देनी होती है

2️⃣ Rajya Sabha (राज्यसभा)

  • परंपरागत रूप से दिन की शुरुआत में, लगभग 11:00 बजे

  • अवधि: लगभग 30 मिनट

  • सदस्य अपनी मांग/विषय की सूचना सभापति (Chairman) को देते हैं


📜 Zero Hour की उत्पत्ति कैसे हुई?

Zero Hour की शुरुआत 1960 के दशक में स्वतः (organically) हुई।

उस समय संसद का लंच ब्रेक 1 बजे होता था। प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद 12:00 बजे का समय खाली रहता था। सांसदों ने इस समय का उपयोग तात्कालिक मुद्दे उठाने के लिए करना शुरू कर दिया।

12:00 बजे को दिन का “शून्य” (Zero) समय माना गया — इसलिए इसे Zero Hour कहा जाने लगा।

बाद में लोकसभा के 10वें स्पीकर Rabi Ray ने इस प्रक्रिया को व्यवस्थित किया, ताकि अधिक सांसद इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकें।

Read Also : मलयालम भाषा विधेयक 2025: प्रमुख प्रावधान, प्रभाव और विवाद

⭐ Zero Hour क्यों महत्वपूर्ण है?

Zero Hour भारतीय लोकतंत्र में एक “Pressure Valve” की तरह काम करता है। इसके महत्व को निम्न बिंदुओं में समझा जा सकता है:

1️⃣ तात्कालिक मुद्दों पर चर्चा

अगर किसी क्षेत्र में अचानक प्राकृतिक आपदा, दुर्घटना या कोई बड़ा नीति परिवर्तन हो जाए, तो सांसद उसी दिन उसे उठा सकते हैं।

2️⃣ सरकार की जवाबदेही

मंत्रियों को बिना पूर्व तैयारी के कठिन प्रश्नों का उत्तर देना पड़ सकता है, जिससे सरकार जवाबदेह बनी रहती है।

3️⃣ जनता की आवाज़

सांसद अपने क्षेत्र की समस्याएँ राष्ट्रीय मंच पर रखते हैं, जिससे स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनते हैं।

4️⃣ लोकतंत्र को मजबूत बनाना

यह प्रक्रिया संसद को अधिक जीवंत और सक्रिय बनाती है।


🔎 Zero Hour और Question Hour में अंतर

आधार Question Hour Zero Hour
नियमों में उल्लेख हाँ नहीं
समय सुबह 11:00 बजे प्रश्नकाल के बाद
नोटिस अवधि पूर्व निर्धारित उसी दिन सुबह
उद्देश्य सरकार से प्रश्न पूछना तात्कालिक मुद्दे उठाना

📌 निष्कर्ष

Zero Hour भारतीय संसद की एक अनूठी और सशक्त परंपरा है, जो सांसदों को तात्कालिक मुद्दों पर तुरंत चर्चा करने का अवसर देती है। भले ही यह संविधान या नियम पुस्तिका में दर्ज नहीं है, लेकिन लोकतंत्र की प्रभावशीलता और जवाबदेही बनाए रखने में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह भारतीय संसदीय प्रणाली की लचीलापन और जीवंतता का प्रतीक है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: February 21, 2026

Share this post: