February 21, 2026 • Updated 1 day ago

बिना कोचिंग, बिना बिजली… लैंप की रोशनी में पढ़कर दो बार UPSC क्रैक करने वाले IAS अंशुमन राज की प्रेरक कहानी

IAS Anshuman Raj studying under kerosene lamp in village Bihar inspirational story

देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा को पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। लेकिन सीमित संसाधनों, आर्थिक कठिनाइयों और बिना कोचिंग के इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं होता।

ऐसी ही प्रेरक कहानी है Anshuman Raj की, जिन्होंने बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर केरोसिन लैंप की रोशनी में पढ़ाई की और आखिरकार ऑल इंडिया 107वीं रैंक हासिल कर IAS अधिकारी बने।

गांव से शुरू हुई संघर्ष की यात्रा

अंशुमन राज बिहार के बक्सर जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। उनके गांव में उस समय बिजली की सुविधा भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं थी।

  • रात में पढ़ाई करने के लिए उन्हें केरोसिन लैंप का सहारा लेना पड़ता था।

  • कक्षा 10वीं तक उन्होंने गांव में रहकर ही पढ़ाई की।

  • संसाधन कम थे, लेकिन सपने बड़े थे।

उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा Jawahar Navodaya Vidyalaya से प्राप्त की। बाद में 12वीं की पढ़ाई के लिए वे रांची चले गए, जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की।

बिना कोचिंग के UPSC की तैयारी

अंशुमन राज एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पास महंगी कोचिंग या बड़े शहरों में रहने की सुविधा नहीं थी।

फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और:

  • पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी के माध्यम से की।

  • सीमित किताबों और ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग किया।

  • समय का सख्ती से पालन किया।

  • नियमित रिवीजन और उत्तर लेखन अभ्यास किया।


पहले प्रयास में सफलता, लेकिन IAS नहीं

उन्होंने अपने पहले प्रयास में ही सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। हालांकि, रैंक के आधार पर उन्हें IRS सेवा मिली।

लेकिन उनका लक्ष्य स्पष्ट था — IAS बनना
इसलिए उन्होंने दोबारा प्रयास करने का निर्णय लिया।


असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार

दूसरे और तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली।
कई लोग यहां हार मान लेते हैं, लेकिन अंशुमन राज ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

आखिरकार वर्ष 2019 में अपने चौथे प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 107वीं रैंक हासिल की और IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।

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उनकी सफलता से क्या सीख मिलती है?

अंशुमन राज की कहानी युवाओं को कई महत्वपूर्ण संदेश देती है:

1. संसाधन नहीं, संकल्प जरूरी है

महंगी कोचिंग के बिना भी सफलता संभव है।

2. असफलता अंत नहीं है

लगातार प्रयास करने से मंजिल जरूर मिलती है।

3. सेल्फ स्टडी की ताकत

यदि सही रणनीति और अनुशासन हो, तो स्वाध्याय भी पर्याप्त है।

4. गांव से भी निकलते हैं अफसर

सफलता केवल बड़े शहरों की मोहताज नहीं है।


निष्कर्ष

अंशुमन राज की कहानी हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के कारण खुद को पीछे महसूस करता है। उन्होंने साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत ईमानदार हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

गांव में लैंप की रोशनी में पढ़ने वाला छात्र आज IAS अधिकारी है — यह केवल एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और धैर्य की मिसाल है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: February 21, 2026

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