January 07, 2026 • Updated 1 month ago

भारत का सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर सिस्टम: भारतीय सेना की तोपखाना शक्ति में ऐतिहासिक छलांग

भारतीय सेना का सूर्यास्त्र मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, 300 किलोमीटर रेंज और उच्च सटीकता के साथ मेक इन इंडिया रक्षा शक्ति का प्रतीक

भारतीय सेना ने अपनी डीप-स्ट्राइक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में सेना ने पुणे स्थित निजी रक्षा कंपनी NIBE Limited के साथ लगभग ₹293 करोड़ का आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) अनुबंध किया है। इस अनुबंध के तहत सेना में शामिल किया जाएगा सूर्यास्त्र मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, जिसे भारत का पहला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर माना जा रहा है।

यह सिस्टम न केवल भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को दर्शाता है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल को भी मजबूती देता है।

सूर्यास्त्र एक अत्याधुनिक मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग प्रकार के रॉकेट और मिसाइल लॉन्च कर सकता है। यह प्रणाली इजरायल के Precise and Universal Launching System (PULS) पर आधारित है, जिसे भारत की जरूरतों के अनुसार स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।

इसका निर्माण पुणे की NIBE Limited ने इजरायल की प्रसिद्ध रक्षा कंपनी Elbit Systems के सहयोग से किया है।

सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर की प्रमुख विशेषताएँ

🚀 300 किलोमीटर तक मारक क्षमता

🎯 हाई-प्रिसीजन स्ट्राइक (सटीक निशाना)

🔄 मल्टी-कैलिबर क्षमता – एक ही लॉन्चर से विभिन्न प्रकार के रॉकेट

⚡ तेज तैनाती और फायरिंग

🛡️ मोबाइल प्लेटफॉर्म – पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में प्रभावी

🌐 नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर के अनुकूल

आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) के तहत क्यों लिया गया फैसला?

यह खरीद रक्षा मंत्रालय की Emergency Procurement (EP) शक्तियों के तहत की गई है। इसका उद्देश्य है:

  • लंबी खरीद प्रक्रिया से बचना
  • सीमाओं पर तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करना
  • चीन और पाकिस्तान सीमा पर रणनीतिक बढ़त हासिल करना

वर्तमान भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए यह फैसला भारतीय सेना की तत्परता और जवाबी क्षमता को बढ़ाता है।

भारतीय तोपखाना रेजिमेंट के लिए क्यों खास है सूर्यास्त्र?

अब तक भारतीय सेना को अलग-अलग कैलिबर के रॉकेट सिस्टम के लिए अलग प्लेटफॉर्म रखने पड़ते थे। सूर्यास्त्र इस समस्या का समाधान करता है क्योंकि:

  • एक ही सिस्टम से कई प्रकार के हथियार
  • लॉजिस्टिक लागत में कमी
  • प्रशिक्षण और रखरखाव आसान
  • युद्ध के दौरान अधिक लचीलापन

यह भारतीय Artillery Corps की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी को कई गुना बढ़ा देगा।

‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

सूर्यास्त्र सिस्टम का स्वदेशी निर्माण भारत की रक्षा उत्पादन नीति के लिए मील का पत्थर है। इसके फायदे:

  • 🇮🇳 विदेशी आयात पर निर्भरता कम
  • 🏭 घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा
  • 👷 रोजगार के नए अवसर
  • 🔬 स्वदेशी टेक्नोलॉजी का विकास

यह परियोजना भारत को रक्षा निर्यातक देश बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

भविष्य में सूर्यास्त्र की भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्यास्त्र सिस्टम भविष्य में:

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में डिटरेंस (Deterrence) बढ़ाएगा
  • दुश्मन के एयरबेस, लॉजिस्टिक हब और कमांड सेंटर पर सटीक हमला संभव बनाएगा
  • नेटवर्क-आधारित युद्ध में सेना की ताकत बढ़ाएगा

निष्कर्ष

सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भारतीय सेना की मारक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक शक्ति का प्रतीक है। ₹293 करोड़ का यह सौदा न केवल सेना की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि भारत को एक आधुनिक और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: January 07, 2026

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