January 11, 2026 • Updated 1 month ago

अरावली रेंज: सुप्रीम कोर्ट द्वारा “यूनिफॉर्म डेफिनिशन” और 100 मीटर नियम की व्याख्या

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली हिल्स के लिए 100 मीटर नियम लागू किया

भारत में अरावली रेंज को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय लिया है। यह निर्णय न केवल पारिस्थितिकी संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में पर्यावरणीय नुकसान को भी रोकने में मदद मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और 100 मीटर नियम

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली हिल्स के लिए यूनिफॉर्म डेफिनिशन जारी किया है। अब से केवल वे भू-आकृति जिन्हें स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊँचाई पर उभरी हुई माना जाएगा, उन्हें आधिकारिक तौर पर अरावली हिल्स के रूप में मान्यता दी जाएगी।

इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्यों द्वारा अरावली हिल्स की अलग-अलग परिभाषाओं के कारण हो रहे पर्यावरणीय नुकसान को रोकना है। इससे अब तक कम ऊँचाई वाले इलाके भी खनन और विकास के लिए खुले रहते थे, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर पड़ता था।

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क्यों महत्वपूर्ण है अरावली रेंज?

अरावली रेंज दुनिया की सबसे प्राचीन भौगोलिक संरचनाओं में से एक है। इसे उत्तर भारत की ‘ग्रीन लंग्स’ भी कहा जाता है। इसकी भूमिका न केवल जंगलों और जैव विविधता को संरक्षित करना है, बल्कि यह थार रेगिस्तान से उत्तर भारत की भूमि की सुरक्षा करने वाला प्राकृतिक ढाल भी है।

अरावली की मिट्टी और जंगल:

  • जलवायु संतुलन बनाए रखने में सहायक
  • भूमिगत जलस्तर को बनाए रखने में मददगार
  • रेगिस्तान फैलाव को रोकने में सहायक
  • जैव विविधता का प्राकृतिक आवास

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के तहत:

  • सभी नए खनन पट्टों पर रोक – दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में नए खनन कार्य स्थगित।
  • सतत प्रबंधन योजना अनिवार्य – अरावली क्षेत्र में जल पुनर्भरण और पारिस्थितिकी संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए।
  • क्षेत्रीय भ्रम खत्म – अब हर राज्य में हिल्स की परिभाषा समान होगी, जिससे पारिस्थितिकी और खनन गतिविधियों में संतुलन बना रहेगा।

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अरावली संरक्षण की आवश्यकता

अरावली की सुरक्षा सिर्फ पर्यावरण की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानव जीवन, जल संरक्षण और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए भी आवश्यक है। यदि अरावली के जंगल और हिल्स को बचाया नहीं गया तो:

  • जलस्तर गिर सकता है
  • रेगिस्तान का फैलाव बढ़ सकता है
  • प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है
  • जैव विविधता को नुकसान होगा

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय अरावली हिल्स के दीर्घकालिक संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। 100 मीटर नियम से अब इन प्राकृतिक संरचनाओं को बचाने में आसानी होगी और खनन या अवैध निर्माण से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा।

अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं हैं, यह उत्तर भारत के प्राकृतिक ढाल, जलस्तर संरक्षक और ग्रीन लंग्स हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: January 11, 2026

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