February 17, 2026 • Updated 4 day ago

AIIMS ने रचा इतिहास: अंटार्कटिका में 12,000 किमी दूर से पहली रिमोट अल्ट्रासाउंड जांच

AIIMS द्वारा अंटार्कटिका के मैत्री स्टेशन में पहली रिमोट अल्ट्रासाउंड जांच

भारत ने चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। AIIMS ने 12,000 किमी दूर अंटार्कटिका में पहली रिमोट अल्ट्रासाउंड जांच सफलतापूर्वक की — यह उपलब्धि टेलीमेडिसिन और रोबोटिक तकनीक के भविष्य को नई दिशा देती है।

दिल्ली से अंटार्कटिका तक फैली इस तकनीकी कड़ी ने साबित कर दिया कि अब दुनिया का सबसे दूरस्थ और कठोर इलाका भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से अछूता नहीं रहेगा।

किसने किया इस ऐतिहासिक रिमोट अल्ट्रासाउंड का आयोजन?

इस विश्व-स्तरीय उपलब्धि को AIIMS New Delhi के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अंजाम दिया। उन्होंने लगभग 12,000 किलोमीटर दूर स्थित भारत के अंटार्कटिक रिसर्च स्टेशन Maitri Research Station में मौजूद मरीज की अल्ट्रासाउंड जांच रिमोट तरीके से की।

इस परियोजना में तकनीकी सहयोग IIT Delhi, लॉजिस्टिक सपोर्ट National Centre for Polar and Ocean Research (NCPOR) तथा निजी क्षेत्र की कंपनी Addverb Technologies ने दिया।

NCPOR के निदेशक डॉ. थंबन मेलोथ ने इसे ध्रुवीय चिकित्सा तकनीक में भारत की अग्रणी भूमिका का प्रतीक बताया।

क्या है टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड तकनीक?

टेली-रोबोटिक तकनीक एक ऐसी प्रणाली है जिसमें डॉक्टर दूर बैठे रोबोटिक आर्म के माध्यम से मरीज की जांच कर सकते हैं।

इसकी मुख्य विशेषताएं:

  • रोबोटिक आर्म द्वारा रिमोट अल्ट्रासाउंड स्कैन

  • रियल-टाइम कनेक्टिविटी और लाइव इमेजिंग

  • बिना शारीरिक संपर्क के विशेषज्ञ जांच

  • आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय लेने में सहायता

इस तकनीक का पहला सफल परीक्षण COVID-19 महामारी के दौरान AIIMS में किया गया था। अब इसे अंटार्कटिका जैसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी सफलतापूर्वक लागू किया गया है।


भारत का मैत्री स्टेशन: अंटार्कटिका में अनुसंधान का केंद्र

Maitri Research Station भारत का दूसरा स्थायी अंटार्कटिक बेस है, जिसकी स्थापना 1989 में की गई थी।

इसकी प्रमुख विशेषताएं:

  • वर्षभर संचालित अनुसंधान केंद्र
  • पूर्वी अंटार्कटिका में स्थित
  • 25–30 वैज्ञानिकों और कर्मियों के रहने की व्यवस्था
  • 2029 तक “मैत्री-2” परियोजना के तहत 90 शोधकर्ताओं की क्षमता वाला नया स्टेशन प्रस्तावित

NCPOR, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है, भारत के अंटार्कटिक कार्यक्रम का समन्वय करता है और मैत्री व Bharati Research Station जैसे स्टेशनों का संचालन करता है।

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इस उपलब्धि का महत्व

यह उपलब्धि केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर चिकित्सा सेवाओं की पहुंच को विस्तारित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

इससे मिलने वाले लाभ:

  • अत्यधिक ठंड और अलग-थलग क्षेत्रों में त्वरित निदान

  • आपात स्थिति में तुरंत मेडिकल निर्णय

  • हेलीकॉप्टर या जहाज द्वारा अनावश्यक निकासी से बचाव

  • ग्रामीण, पहाड़ी और आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग की संभावना

यह नवाचार पोस्ट-कोविड टेलीमेडिसिन विस्तार का परिणाम है और भारत को “Extreme-Environment Medicine” में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करता है।


भविष्य की संभावनाएं

इस तकनीक का उपयोग भविष्य में निम्न क्षेत्रों में किया जा सकता है:

  • उच्च पर्वतीय सैन्य चौकियां

  • समुद्री जहाज और ऑफशोर प्लेटफॉर्म

  • आपदा-प्रभावित क्षेत्र

  • दूरदराज के ग्रामीण इलाके

इस पहल से न केवल भारत के ध्रुवीय अभियानों को मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी रिमोट हेल्थकेयर के नए आयाम खुलेंगे।


निष्कर्ष

AIIMS द्वारा अंटार्कटिका में पहली रिमोट अल्ट्रासाउंड जांच भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि आधुनिक चिकित्सा अब भौगोलिक सीमाओं से परे जा चुकी है।

भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह न केवल अंतरिक्ष और तकनीक में, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में भी विश्व स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: February 17, 2026

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