May 16, 2026 • Updated 7 day ago

दुनिया की सबसे लंबी क्रॉस-कंट्री ऑयल पाइपलाइन कौन सी है? जानिए “Friendship Pipeline” का इतिहास और महत्व

Druzhba Friendship Pipeline दुनिया की सबसे लंबी ऑयल पाइपलाइन का दृश्य

दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में तेल पाइपलाइनें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये पाइपलाइनें हजारों किलोमीटर तक फैली होती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था को ऊर्जा प्रदान करती हैं। इन्हीं में से एक है द्रुज़्बा पाइपलाइन (Druzhba Pipeline), जिसे दुनिया की सबसे लंबी क्रॉस-कंट्री ऑयल पाइपलाइन माना जाता है। इसे “Friendship Pipeline” के नाम से भी जाना जाता है।

यह विशाल पाइपलाइन रूस से शुरू होकर यूरोप के कई देशों तक कच्चे तेल की आपूर्ति करती है। लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी मुख्य लाइन और करीब 5,500 किलोमीटर तक फैले नेटवर्क के साथ यह आधुनिक इंजीनियरिंग का एक अद्भुत उदाहरण है।


दुनिया की सबसे लंबी ऑयल पाइपलाइन कौन सी है?

दुनिया की सबसे लंबी क्रॉस-कंट्री ऑयल पाइपलाइन द्रुज़्बा पाइपलाइन (Druzhba Pipeline) है। यह पाइपलाइन रूस से शुरू होकर यूरोप के कई देशों तक जाती है। “Druzhba” रूसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ “दोस्ती” (Friendship) होता है। इसी वजह से इसे Friendship Pipeline कहा जाता है।

यह पाइपलाइन रूस के अल्मेत्येव्स्क (Almetyevsk) क्षेत्र से शुरू होती है और बेलारूस पहुंचकर दो मुख्य शाखाओं में विभाजित हो जाती है।


द्रुज़्बा पाइपलाइन किन देशों से होकर गुजरती है?

द्रुज़्बा पाइपलाइन यूरोप के कई देशों को जोड़ती है। इसकी मुख्य शाखाएं निम्न प्रकार हैं:

1. उत्तरी शाखा (Northern Branch)

यह शाखा निम्न देशों से होकर गुजरती है:

  • रूस
  • बेलारूस
  • पोलैंड
  • जर्मनी

2. दक्षिणी शाखा (Southern Branch)

यह शाखा निम्न देशों तक तेल पहुंचाती है:

  • रूस
  • यूक्रेन
  • हंगरी
  • स्लोवाकिया
  • चेक गणराज्य

इस प्रकार यह पाइपलाइन सीधे तौर पर लगभग 7 देशों को जोड़ती है, जबकि इसकी अन्य सहायक शाखाएं यूरोप के और भी हिस्सों तक पहुंचती हैं।


द्रुज़्बा पाइपलाइन की लंबाई कितनी है?

  • मुख्य पाइपलाइन की लंबाई: लगभग 4,000 किलोमीटर
  • सभी शाखाओं और विस्तार सहित कुल नेटवर्क: लगभग 5,500 किलोमीटर

यह पाइपलाइन दुनिया के सबसे बड़े तेल परिवहन नेटवर्क में शामिल है।


द्रुज़्बा पाइपलाइन का इतिहास

द्रुज़्बा पाइपलाइन का निर्माण 1960 से 1964 के बीच किया गया था। उस समय सोवियत संघ (USSR) ने अपने सहयोगी देशों को सस्ता और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस परियोजना की शुरुआत की थी।

यह पाइपलाइन शीत युद्ध (Cold War) के दौर में पूर्वी यूरोप और सोवियत संघ के बीच आर्थिक सहयोग का प्रतीक बन गई थी।


द्रुज़्बा पाइपलाइन की विशेषताएं

प्रतिदिन तेल परिवहन क्षमता

यह पाइपलाइन प्रतिदिन लगभग:

  • 1.2 से 1.4 मिलियन बैरल कच्चा तेल परिवहन कर सकती है।

कठिन भौगोलिक मार्ग

यह पाइपलाइन:

  • 45 बड़ी नदियों
  • 200 से अधिक रेलवे और हाईवे

को पार करती है।

इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण

1960 के दशक में इतनी विशाल पाइपलाइन का निर्माण उस समय की इंजीनियरिंग क्षमता का बड़ा उदाहरण माना जाता है।


दुनिया की अन्य सबसे लंबी ऑयल पाइपलाइनें

द्रुज़्बा पाइपलाइन के अलावा दुनिया में कई अन्य लंबी तेल पाइपलाइनें भी मौजूद हैं। नीचे 2026 तक की प्रमुख पाइपलाइनें दी गई हैं:

पाइपलाइन का नाम मुख्य क्षेत्र अनुमानित लंबाई
द्रुज़्बा पाइपलाइन रूस से यूरोप 4,000 – 5,500 किमी
ESPO Pipeline रूस से एशिया-प्रशांत 4,850 किमी
Keystone Pipeline कनाडा से अमेरिका 3,400 किमी
Kazakhstan-China Pipeline कजाकिस्तान से चीन 2,230 किमी
Baku-Tbilisi-Ceyhan अज़रबैजान से तुर्की 1,768 किमी

वैश्विक ऊर्जा में द्रुज़्बा पाइपलाइन की भूमिका

द्रुज़्बा पाइपलाइन केवल एक तेल परिवहन मार्ग नहीं है, बल्कि यह यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। कई यूरोपीय देश लंबे समय तक अपनी तेल जरूरतों के लिए इसी पाइपलाइन पर निर्भर रहे।

हालांकि हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीतियों के कारण यूरोप ने वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों की तलाश शुरू कर दी है।

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क्यों कहा जाता है “Friendship Pipeline”?

“Druzhba” का अर्थ रूसी भाषा में “दोस्ती” होता है। यह नाम उस समय रखा गया था जब सोवियत संघ और उसके सहयोगी देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग मजबूत था। इसलिए इसे Friendship Pipeline कहा गया।


निष्कर्ष

द्रुज़्बा पाइपलाइन दुनिया की सबसे लंबी क्रॉस-कंट्री ऑयल पाइपलाइन है, जिसने दशकों तक यूरोप और रूस के बीच ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ के रूप में काम किया है। लगभग 5,500 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के साथ यह पाइपलाइन आधुनिक औद्योगिक इंजीनियरिंग और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग का प्रतीक मानी जाती है।

आज भी यह पाइपलाइन वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, हालांकि दुनिया अब धीरे-धीरे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रही है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: May 16, 2026

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