February 14, 2026 • Updated 7 day ago

National Large Solar Telescope (NLST) और NLOT: भारत के दो मेगा टेलीस्कोप – उद्देश्य, विशेषताएँ और लेटेस्ट अपडेट

लद्दाख में प्रस्तावित National Large Solar Telescope (NLST) और National Large Optical Near Infrared Telescope (NLOT) का प्रतीकात्मक चित्र

भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026–27 में देश की खगोलीय अवसंरचना (Astronomical Infrastructure) को मजबूत करने के लिए दो मेगा टेलीस्कोप परियोजनाओं की घोषणा की है –

  1. National Large Solar Telescope (NLST)

  2. National Large Optical–Near Infrared Telescope (NLOT)

ये दोनों टेलीस्कोप लद्दाख के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थापित किए जाएंगे और भारत को वैश्विक खगोल विज्ञान अनुसंधान में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


☀️ National Large Solar Telescope (NLST)

NLST एक प्रस्तावित 2-मीटर क्लास का ग्राउंड-बेस्ड ऑप्टिकल और नियर-इन्फ्रारेड (IR) सोलर टेलीस्कोप है, जिसे लद्दाख के मेरक क्षेत्र में Pangong Tso के पास लगभग 4200 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा।

🔎 NLST के प्रमुख उद्देश्य

  • सूर्य के चुंबकीय क्षेत्रों (Solar Magnetic Fields) की उत्पत्ति और गतिशीलता का अध्ययन

  • 0.1–0.3 आर्क-सेकंड की उच्च स्थानिक रिज़ॉल्यूशन पर सूर्य का अवलोकन

  • सौर ज्वालाओं (Solar Flares) और कोरोनल गतिविधियों की गहराई से जांच

  • अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) की बेहतर भविष्यवाणी में सहायता

🌈 NLST की प्रमुख विशेषताएँ

  • 2-मीटर क्लास ऑप्टिकल और नियर-IR टेलीस्कोप

  • दृश्य (Visible) और नियर-इन्फ्रारेड वेवलेंथ में कार्य करेगा

  • 4200 मीटर की ऊंचाई – साफ और पारदर्शी आकाश

  • जापान और यूरोप के बीच “Longitudinal Gap” को भरेगा, जिससे 24 घंटे सूर्य की निरंतर निगरानी संभव होगी

  • Aditya-L1 मिशन के अंतरिक्ष-आधारित अवलोकनों को सपोर्ट करेगा

  • Udaipur Solar Observatory (MAST टेलीस्कोप) के साथ समन्वय

📍 क्यों चुना गया मेरक, लद्दाख?

  • उच्च ऊंचाई वाला शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र

  • दिनभर स्थिर (Laminar) हवाएं

  • अत्यधिक पारदर्शी आकाश (Coronagraphic Skies)

  • न्यूनतम वायुमंडलीय विक्षोभ


🌌 National Large Optical–Near Infrared Telescope (NLOT)

NLOT भारत का फ्लैगशिप ग्राउंड-बेस्ड ऑप्टिकल टेलीस्कोप होगा, जो मौजूदा 4-मीटर क्लास टेलीस्कोप से कहीं अधिक उन्नत और शक्तिशाली होगा।

🔭 NLOT के प्रमुख उद्देश्य

  • प्रारंभिक ब्रह्मांड (Early Universe) का अध्ययन

  • तारों के जन्म (Star Formation) की प्रक्रिया को समझना

  • दूरस्थ आकाशगंगाओं की संरचना (Galaxy Morphology)

  • एक्सोप्लैनेट्स (अन्य तारों के चारों ओर घूमने वाले ग्रह) की पहचान

  • सुपरनोवा और गामा-रे बर्स्ट (GRBs) जैसे क्षणिक खगोलीय घटनाओं का अध्ययन

  • आकाशगंगा (Milky Way) के रासायनिक विकास का विश्लेषण

⚙️ NLOT की प्रमुख विशेषताएँ

  • 12–13.7 मीटर क्लास टेलीस्कोप
  • Segmented Mirror Technology (JWST और TMT जैसी उन्नत तकनीक)
  • 0.3 से 5 माइक्रॉन वेवलेंथ रेंज में अवलोकन
  • मौजूदा Devasthal Optical Telescope (3.6 मीटर) से कई गुना अधिक शक्तिशाली
  • दर्पण सेगमेंट्स का निर्माण बेंगलुरु के ITOFF केंद्र में

📍 स्थापना स्थल – हानले, लद्दाख

NLOT को Indian Astronomical Observatory (IAO) परिसर में स्थापित किया जाएगा, जो Hanle Dark Sky Reserve का हिस्सा है।

  • दुनिया के सबसे स्वच्छ और अंधकारमय आकाश

  • न्यूनतम प्रकाश प्रदूषण

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध वातावरण

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भारत के लिए इन टेलीस्कोप का महत्व

  • भारत को खगोल विज्ञान में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाना

  • अंतरिक्ष अनुसंधान में आत्मनिर्भरता

  • युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर

  • स्पेस वेदर और सोलर स्टॉर्म की बेहतर समझ

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा


📌 लेटेस्ट अपडेट (Budget 2026–27)

  • दोनों मेगा टेलीस्कोप परियोजनाओं को बजट में औपचारिक मंजूरी

  • लद्दाख में बुनियादी ढांचे के विकास की योजना

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक और स्वदेशी निर्माण का संयोजन


🔚 निष्कर्ष

National Large Solar Telescope (NLST) और National Large Optical–Near Infrared Telescope (NLOT) भारत के खगोल विज्ञान क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम हैं। ये परियोजनाएं न केवल वैज्ञानिक शोध को नई दिशा देंगी, बल्कि भारत को वैश्विक खगोलीय मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

इन दोनों टेलीस्कोप के माध्यम से भारत सूर्य से लेकर दूरस्थ आकाशगंगाओं तक की गुत्थियों को सुलझाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है। 🌠

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: February 14, 2026

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