March 26, 2026 • Updated 15 day ago

नालंदा विश्वविद्यालय के संस्थापक कौन थे? – प्राचीन भारत के विश्व प्रसिद्ध ज्ञान केंद्र की पूरी कहानी 📚

Nalanda University ruins in Bihar and founder Kumaragupta I ancient Indian university history

भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा विश्वभर में प्रसिद्ध रही है। इन्हीं महान संस्थानों में से एक था नालंदा विश्वविद्यालय, जिसे दुनिया का पहला पूर्ण आवासीय (Residential) विश्वविद्यालय माना जाता है। यहां छात्र और शिक्षक एक ही परिसर में रहते थे और ज्ञान प्राप्त करते थे।

नालंदा विश्वविद्यालय न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया में शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र था। चीन, कोरिया, तिब्बत और दक्षिण-पूर्व एशिया के हजारों छात्र यहां अध्ययन करने आते थे।

लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक सवाल आता है — नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना किसने की थी? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।


नालंदा विश्वविद्यालय के संस्थापक कौन थे? 🏛️

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त वंश के सम्राट कुमारगुप्त प्रथम (Kumaragupta I) ने लगभग 427 ईस्वी (5वीं शताब्दी) में की थी।

कुमारगुप्त प्रथम, चंद्रगुप्त द्वितीय के पुत्र थे और गुप्त साम्राज्य के शक्तिशाली शासकों में से एक माने जाते हैं। उन्हें शक्रादित्य (Shakraditya) के नाम से भी जाना जाता था।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना का श्रेय मुख्य रूप से कुमारगुप्त प्रथम को दिया जाता है।

हालांकि बाद में कई अन्य शासकों ने भी इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिनमें शामिल हैं:

  • सम्राट हर्षवर्धन
  • पाल वंश के राजा

इन शासकों के संरक्षण में नालंदा विश्वविद्यालय और अधिक विकसित हुआ और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र बन गया।


नालंदा विश्वविद्यालय का महत्व 🌏

नालंदा विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि यह ज्ञान, संस्कृति और बौद्ध दर्शन का वैश्विक केंद्र था।

यहां हजारों छात्र विभिन्न देशों से पढ़ने आते थे। विश्वविद्यालय में प्रवेश प्राप्त करना भी आसान नहीं था।

नालंदा विश्वविद्यालय की विशेषताएं

  • यहां प्रवेश के लिए कठिन परीक्षा देनी पड़ती थी
  • परिसर में मठ (Monasteries), व्याख्यान कक्ष और विशाल पुस्तकालय थे
  • छात्र और शिक्षक एक साथ परिसर में रहते थे
  • यहां हजारों छात्र और सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहते थे

यह व्यवस्था इसे दुनिया का पहला पूर्ण आवासीय विश्वविद्यालय बनाती है।


नालंदा विश्वविद्यालय का प्रसिद्ध पुस्तकालय 📖

नालंदा का पुस्तकालय बहुत विशाल और प्रसिद्ध था, जिसे धर्मगंज (Dharmaganja) कहा जाता था।

इस पुस्तकालय के तीन मुख्य भवन थे:

  • रत्नसागर (Ratnasagara)
  • रत्नोदधि (Ratnodadhi)
  • रत्नरंजक (Ratnaranjaka)

इनमें हजारों प्राचीन पांडुलिपियां और ग्रंथ सुरक्षित रखे जाते थे। कहा जाता है कि यहां ज्ञान का इतना बड़ा भंडार था कि इसे प्राचीन दुनिया के सबसे बड़े पुस्तकालयों में गिना जाता था।


नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाए जाने वाले विषय 🎓

5वीं शताब्दी में ही नालंदा विश्वविद्यालय में कई उन्नत विषय पढ़ाए जाते थे।

मुख्य विषयों में शामिल थे:

  • बौद्ध दर्शन
  • तर्कशास्त्र (Logic)
  • व्याकरण
  • आयुर्वेद (Medicine)
  • गणित
  • खगोल विज्ञान
  • धर्म और दर्शन

यह दर्शाता है कि प्राचीन भारत की शिक्षा प्रणाली कितनी उन्नत और संगठित थी।


नालंदा विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध विदेशी विद्यार्थी 🌍

नालंदा विश्वविद्यालय में कई प्रसिद्ध विदेशी विद्वान भी अध्ययन करने आए थे।

सबसे प्रसिद्ध आगंतुकों में शामिल हैं:

  • ह्वेनसांग (Xuanzang / Hiuen Tsang) – चीन के प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु और यात्री
  • यी जिंग (Yi Jing) – चीन के विद्वान और यात्री

इन विद्वानों ने अपने लेखों में नालंदा विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और विशालता का विस्तार से वर्णन किया है।


नालंदा विश्वविद्यालय का पतन ⚔️

लगभग 800 वर्षों तक नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान का केंद्र बना रहा।

लेकिन 12वीं शताब्दी में आक्रमणों के कारण इस महान विश्वविद्यालय का पतन हो गया। इसके विशाल पुस्तकालय और भवन नष्ट हो गए और धीरे-धीरे यह शिक्षा केंद्र समाप्त हो गया।

आज इसके अवशेष बिहार में भारत की महान शैक्षिक विरासत की याद दिलाते हैं।

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नालंदा विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य 📌

विशेषता जानकारी
स्थापना 5वीं शताब्दी (427 CE)
संस्थापक कुमारगुप्त प्रथम
स्थान राजगीर, नालंदा जिला, बिहार
प्रसिद्ध पुस्तकालय धर्मगंज
प्रसिद्ध आगंतुक ह्वेनसांग और यी जिंग
यूनेस्को दर्जा 2016 में विश्व धरोहर सूची में शामिल

UNESCO विश्व धरोहर स्थल 🌍

नालंदा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए 2016 में इसे UNESCO World Heritage Site घोषित किया गया।

यह भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।


निष्कर्ष ✍️

नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत की शिक्षा और ज्ञान परंपरा का अद्भुत उदाहरण है। इसकी स्थापना गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने 5वीं शताब्दी में की थी और यह लगभग 800 वर्षों तक दुनिया का प्रमुख शिक्षा केंद्र रहा।

आज भी नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष हमें यह याद दिलाते हैं कि भारत सदियों से ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति का वैश्विक केंद्र रहा है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: March 26, 2026

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