May 27, 2026 • Updated 3 day ago

मेकेदातु डैम किस नदी पर स्थित है? जानें लोकेशन, विवाद, मैप, प्रमुख तथ्य और ताज़ा अपडेट

Mekedatu Dam on Cauvery River in Karnataka with map and project details

भारत में पानी को लेकर राज्यों के बीच विवाद कोई नई बात नहीं है। दक्षिण भारत में कावेरी नदी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। इसी विवाद के केंद्र में अब मेकेदातु डैम (Mekedatu Dam Project) आ गया है। कर्नाटक सरकार इसे बेंगलुरु की पेयजल समस्या का समाधान बता रही है, जबकि तमिलनाडु इसका लगातार विरोध कर रहा है।

इस लेख में जानेंगे कि मेकेदातु डैम किस नदी पर स्थित है, इसकी लोकेशन, परियोजना की खास बातें, विवाद की वजह और ताज़ा अपडेट क्या हैं।


मेकेदातु डैम किस नदी पर स्थित है?

मेकेदातु डैम कावेरी (Cauvery/Kaveri) नदी पर प्रस्तावित है। यह स्थान कर्नाटक के रामनगर जिले में स्थित एक गहरे संकरे दर्रे “मेकेदातु” में आता है।

यह वही जगह है जहां मुख्य कावेरी नदी और उसकी सहायक नदी अर्कावती (Arkavathi River) का संगम होता है। “मेकेदातु” का अर्थ स्थानीय भाषा में “बकरी की छलांग” (Goat’s Leap) होता है।


मेकेदातु डैम की लोकेशन

प्रमुख स्थान संबंधी जानकारी

  • राज्य: कर्नाटक, भारत
  • जिले: रामनगर और चामराजनगर
  • नदी: कावेरी नदी
  • निकटतम बड़ा शहर: बेंगलुरु
  • बेंगलुरु से दूरी: लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण
  • तमिलनाडु सीमा से दूरी: करीब 4-5 किलोमीटर upstream

यह परियोजना उस क्षेत्र में प्रस्तावित है जहां से कावेरी नदी आगे तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में प्रवेश करती है।


मेकेदातु डैम परियोजना क्या है?

मेकेदातु परियोजना को कर्नाटक सरकार ने एक मल्टीपर्पज बैलेंसिंग रिजर्वायर के रूप में प्रस्तावित किया है। इसका उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन नहीं बल्कि बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों को स्थायी पेयजल उपलब्ध कराना भी है।

यह परियोजना Cauvery Neeravari Nigam Ltd. के प्रशासनिक नियंत्रण में प्रस्तावित है।


मेकेदातु डैम परियोजना के प्रमुख तथ्य

परियोजना पैरामीटर विवरण
परियोजना का प्रकार मल्टीपर्पज बैलेंसिंग रिजर्वायर
अनुमानित लागत लगभग ₹9,000 करोड़
प्रस्तावित क्षमता 67.16 TMC
पेयजल आवंटन 4.75 TMC
बिजली उत्पादन क्षमता 400 MW
लाभार्थी क्षेत्र बेंगलुरु और आसपास के इलाके
पर्यावरणीय प्रभाव 3,100 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित

मेकेदातु परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?

1. बेंगलुरु की बढ़ती पानी की समस्या

बेंगलुरु तेजी से बढ़ता हुआ महानगर है। बढ़ती आबादी के कारण शहर में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। कर्नाटक सरकार का दावा है कि यह परियोजना भविष्य में शहर की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।

2. जलविद्युत उत्पादन

इस परियोजना से लगभग 400 मेगावाट जलविद्युत ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

3. जल भंडारण क्षमता

यह एक बैलेंसिंग रिजर्वायर होगा, जिसका उद्देश्य बारिश के समय अतिरिक्त पानी को स्टोर करना है।


कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद क्यों है?

मेकेदातु परियोजना कावेरी जल विवाद को और जटिल बना रही है।

कर्नाटक का पक्ष

कर्नाटक सरकार का कहना है कि:

  • यह परियोजना मुख्य रूप से पेयजल के लिए है।
  • तमिलनाडु को मिलने वाले पानी में कोई कटौती नहीं होगी।
  • यह केवल “balancing reservoir” के रूप में काम करेगा।

तमिलनाडु का पक्ष

तमिलनाडु का आरोप है कि:

  • डैम बनने से कावेरी नदी के जल प्रवाह पर नियंत्रण बढ़ जाएगा।
  • इससे downstream राज्यों को मिलने वाले पानी पर असर पड़ेगा।
  • यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) की भावना के खिलाफ है।

पर्यावरणीय चिंताएं

इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा कावेरी वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।

संभावित प्रभाव

  • 3,100 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र डूब सकता है।
  • वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है।
  • पर्यावरणविद लगातार इस परियोजना पर सवाल उठा रहे हैं।

मेकेदातु डैम पर ताज़ा अपडेट

हाल के महीनों में यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।

सुप्रीम कोर्ट और कानूनी स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि परियोजना की तकनीकी जांच का अधिकार:

  • Central Water Commission (CWC)
  • Cauvery Water Management Authority (CWMA)

जैसी संस्थाओं के पास है।

तमिलनाडु द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन भी खारिज की जा चुकी है।

कर्नाटक सरकार की तैयारी

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि:

  • संशोधित DPR (Detailed Project Report) तेजी से तैयार की जा रही है।
  • केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद भूमि पूजन किया जाएगा।

तमिलनाडु की प्रतिक्रिया

तमिलनाडु सरकार ने इस कदम का विरोध करते हुए:

  • कानूनी विशेषज्ञों के साथ आपात बैठक की।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परियोजना रोकने की मांग की।
  • इसे सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का उल्लंघन बताया।

क्या मेकेदातु डैम बनेगा?

यह सवाल अभी भी खुला हुआ है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए:

  • केंद्र सरकार की मंजूरी
  • पर्यावरणीय स्वीकृति
  • अंतर-राज्यीय सहमति

तीनों की आवश्यकता होगी।

जब तक कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच सहमति नहीं बनती, तब तक यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना रहेगा।

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निष्कर्ष

मेकेदातु डैम परियोजना केवल एक बांध परियोजना नहीं बल्कि दक्षिण भारत की जल राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। जहां कर्नाटक इसे बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं तमिलनाडु इसे अपने जल अधिकारों के लिए खतरा मान रहा है।

आने वाले समय में केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और जल प्रबंधन संस्थाओं की भूमिका इस परियोजना का भविष्य तय करेगी।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: May 27, 2026

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