February 26, 2026 • Updated 7 day ago

NO UPI Data: नई GDP सीरीज में UPI ट्रांजैक्शन डेटा शामिल नहीं होगा

India New GDP Series 2022-23 Update, UPI Data Excluded by MoSPI 2026

भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने स्पष्ट किया है कि नई संशोधित GDP (Gross Domestic Product) सीरीज में UPI (Unified Payments Interface) लेन-देन के डेटा को शामिल नहीं किया जाएगा। नई GDP सीरीज का आधार वर्ष 2022-23 होगा और इसे 27 फरवरी 2026 को जारी किया जाना प्रस्तावित है।

सरकार का कहना है कि UPI डेटा में अस्थिरता (instability) और व्यापक भुगतान श्रेणियों (classification limitations) के कारण इसे GDP गणना में शामिल करना फिलहाल उपयुक्त नहीं है।


भारत की GDP क्या है?

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।

यह किसी भी देश की आर्थिक सेहत का प्रमुख सूचकांक माना जाता है। GDP के माध्यम से यह समझा जाता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ रही है, किस क्षेत्र में उत्पादन बढ़ा है और किस क्षेत्र में गिरावट आई है।


नई GDP सीरीज 2022-23: क्या होगा बदलाव?

भारत में समय-समय पर GDP की गणना के लिए आधार वर्ष (Base Year) बदला जाता है, ताकि अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके।

प्रमुख बिंदु:

  • नई GDP सीरीज का आधार वर्ष 2022-23 होगा।

  • इसे 27 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा।

  • वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही GDP सीरीज का आधार वर्ष 2011-12 है।

  • नई सीरीज में डिजिटल और पोस्ट-पैंडेमिक अर्थव्यवस्था के प्रभाव को बेहतर तरीके से शामिल करने की कोशिश होगी।

विशेषज्ञों का मानना था कि 2011-12 का आधार वर्ष आज की डिजिटल और गिग अर्थव्यवस्था (Gig Economy) को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता। इसलिए नया आधार वर्ष अधिक प्रासंगिक माना जा रहा है।


GDP गणना में UPI डेटा क्यों शामिल नहीं किया जाएगा?

हाल के वर्षों में UPI लेन-देन में जबरदस्त वृद्धि हुई है। डिजिटल भुगतान ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। फिर भी, MoSPI ने इसे GDP गणना में शामिल न करने का निर्णय लिया है।

इसके मुख्य कारण:

  1. डेटा की अस्थिरता (Unstable Numbers):
    UPI ट्रांजैक्शन की संख्या तेजी से बदलती रहती है, जिससे स्थिर आर्थिक अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है।

  2. वर्गीकरण की समस्या (Classification Issues):
    UPI के माध्यम से होने वाले भुगतान विभिन्न श्रेणियों में आते हैं—जैसे व्यक्तिगत ट्रांसफर, बिज़नेस पेमेंट, सब्सक्रिप्शन, सेवाएं आदि। इनका सटीक आर्थिक वर्गीकरण चुनौतीपूर्ण है।

  3. डबल काउंटिंग का जोखिम:
    कई लेन-देन पहले से ही अन्य डेटा स्रोतों के माध्यम से GDP में शामिल हो सकते हैं, जिससे दोहरी गणना की संभावना रहती है।


आधार वर्ष बदलना क्यों जरूरी है?

आधार वर्ष बदलने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:

  • नई उद्योगों और सेवाओं को शामिल किया जा सके।

  • उपभोक्ता व्यवहार में आए बदलाव को दर्शाया जा सके।

  • मौजूदा मूल्य स्तर (Current Price Level) को ध्यान में रखा जा सके।

  • अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि दर को अधिक सटीक रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप इकोसिस्टम और गिग वर्क जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने के लिए आधार वर्ष 2022-23 अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।


नई GDP सीरीज से क्या होगा प्रभाव?

नई GDP सीरीज जारी होने के बाद:

  • देश की विकास दर (Growth Rate) के आंकड़ों में बदलाव दिख सकता है।

  • कुछ क्षेत्रों का योगदान बढ़ा या घटा हुआ नजर आ सकता है।

  • आर्थिक नीतियों और बजट निर्माण पर प्रभाव पड़ सकता है।

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति का आकलन नए आधार पर होगा।

हालांकि UPI डेटा को सीधे शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य विश्वसनीय डेटा स्रोतों को शामिल करने की संभावना बनी रहेगी।


निष्कर्ष

नई GDP सीरीज भारत की बदलती आर्थिक संरचना को दर्शाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधार वर्ष 2022-23 के साथ यह सीरीज अधिक आधुनिक और वास्तविक आर्थिक तस्वीर पेश करने का प्रयास करेगी।

हालांकि डिजिटल भुगतान का महत्व लगातार बढ़ रहा है, फिर भी UPI ट्रांजैक्शन डेटा की अस्थिरता और वर्गीकरण संबंधी सीमाओं के कारण इसे फिलहाल GDP गणना में शामिल नहीं किया गया है।

27 फरवरी 2026 को जारी होने वाली नई GDP सीरीज से देश की आर्थिक दिशा और विकास दर की नई तस्वीर सामने आएगी, जो नीति निर्माण और निवेश निर्णयों में अहम भूमिका निभाएगी।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: February 26, 2026

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