January 27, 2026 • Updated 7 day ago

Most Congested Cities 2026: बेंगलुरु और दिल्ली क्यों हैं दुनिया के सबसे जामग्रस्त शहर?

2026 में बेंगलुरु और दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम दिखाती हुई सड़कों की तस्वीर

भारत के महानगरों में ट्रैफिक अब सिर्फ़ असुविधा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। TomTom Traffic Index 2026 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत एशिया का दूसरा सबसे अधिक ट्रैफिक जाम वाला देश बन गया है। इस सूची में बेंगलुरु ने दुनिया का दूसरा सबसे अधिक कंजेस्टेड शहर होने का स्थान हासिल किया है, जबकि दिल्ली में ट्रैफिक जाम की स्थिति और भी बदतर हो गई है।

बेंगलुरु: दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम वाला शहर

आईटी हब के रूप में पहचाने जाने वाला बेंगलुरु अब ट्रैफिक के लिए भी वैश्विक पहचान बना चुका है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • औसत रश-आवर स्पीड सिर्फ़ 13.9 किमी/घंटा रह गई है
  • संकरी सड़कों और तेज़ी से बढ़ती गाड़ियों की संख्या
  • आईटी कॉरिडोर में सीमित पब्लिक ट्रांसपोर्ट विकल्प

इन कारणों से बेंगलुरु में रोज़ाना घंटों का समय सिर्फ़ ट्रैफिक में फँसकर बर्बाद हो रहा है।

दिल्ली: ट्रैफिक में 3.5% की बढ़ोतरी, 104 घंटे बर्बाद

देश की राजधानी दिल्ली भी इस रेस में पीछे नहीं है। 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक:

  • दिल्ली में ट्रैफिक कंजेशन 3.5% बढ़ा
  • एक आम कम्यूटर साल में 104 घंटे से ज़्यादा ट्रैफिक में फँसा रहता है
  • यह समय लगभग चार पूरे दिनों के बराबर है

तेज़ी से बढ़ती आबादी, निजी वाहनों पर निर्भरता और सीमित सड़क क्षमता दिल्ली के ट्रैफिक संकट को और गहरा बना रही है।

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भारत: एशिया का दूसरा सबसे कंजेस्टेड देश

TomTom डेटा के अनुसार, भारतीय शहर अब एशिया के सबसे ज़्यादा ट्रैफिक जाम वाले हब बन चुके हैं।
हालाँकि मुंबई में थोड़ी सुधार देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर:

  • शहरी विकास की रफ्तार इंफ्रास्ट्रक्चर से तेज़
  • अरबों घंटे की उत्पादकता का नुकसान
  • बढ़ता प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षति

ये सभी भारत के लिए बड़ी चेतावनी हैं।

ट्रैफिक जाम की असली कीमत

ट्रैफिक सिर्फ़ समय नहीं, बल्कि:

  • मानसिक तनाव
  • ईंधन की बर्बादी
  • वायु प्रदूषण
  • आर्थिक नुकसान

का भी कारण बन रहा है। बड़े शहरों में “रश आवर” अब कुछ घंटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे दिन का सच बन चुका है।

समाधान क्या हो सकता है?

ट्रैफिक संकट से निपटने के लिए ज़रूरी है:

  • बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम
  • स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट
  • वर्क-फ्रॉम-होम और फ्लेक्सी टाइमिंग
  • सस्टेनेबल अर्बन प्लानिंग

जब तक इन पर गंभीरता से काम नहीं होगा, तब तक शहरों की रफ्तार जाम में ही फँसी रहेगी।

निष्कर्ष

Most Congested Cities 2026 की रिपोर्ट साफ़ दिखाती है कि भारत के बड़े शहर विकास की कीमत ट्रैफिक जाम के रूप में चुका रहे हैं। बेंगलुरु और दिल्ली इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जहाँ हर मिनट की देरी देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों पर असर डाल रही है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: January 27, 2026

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