March 27, 2026 • Updated 12 day ago

गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026: क्या है नया कानून, मुख्य प्रावधान और इसका प्रभाव

Gujarat Uniform Civil Code Bill 2026 passed in Gujarat Assembly UCC law India

भारत में Uniform Civil Code (UCC) को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। इसी कड़ी में 24 मार्च 2026 को गुजरात विधानसभा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026 को पास कर दिया। इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला भारत का दूसरा राज्य बन गया है।

यह विधेयक राज्य में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को एक समान बनाने का प्रयास करता है। हालांकि इस कानून में अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) और कुछ पारंपरिक अधिकार रखने वाले समुदायों को छूट दी गई है।

नीचे इस नए कानून से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से दी गई है।


गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026 क्या है?

गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026 एक ऐसा कानून है जिसका उद्देश्य राज्य में सभी धार्मिक समुदायों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है।

अब तक भारत में व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार आदि अलग-अलग धर्मों के अनुसार अलग कानूनों के तहत चलते थे, जैसे:

  • हिंदू मैरिज एक्ट
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ
  • क्रिश्चियन मैरिज एक्ट
  • पारसी मैरिज एंड डाइवोर्स एक्ट

नया UCC बिल इन अलग-अलग कानूनों की जगह एक समान कानूनी ढांचा लागू करने की दिशा में कदम है।


गुजरात विधानसभा में कैसे पास हुआ बिल

24 मार्च 2026 को गुजरात विधानसभा में इस बिल पर लगभग 7 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई।

इसके बाद राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा प्रस्तुत 209 पेज के इस विधेयक को विधानसभा ने पारित कर दिया।

सरकार का कहना है कि यह कानून राज्य में कानूनी समानता, सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता को मजबूत करेगा।


UCC बिल 2026 के मुख्य उद्देश्य

इस कानून के पीछे कई महत्वपूर्ण उद्देश्य बताए गए हैं:

  1. सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना
  2. विवाह और तलाक से जुड़े नियमों में समानता लाना
  3. महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करना
  4. उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में स्पष्टता लाना
  5. लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी ढांचे में लाना

गुजरात UCC बिल 2026 के प्रमुख प्रावधान

इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण नियम शामिल किए गए हैं।

1. विवाह के लिए समान कानून

अब सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह से जुड़े नियम समान होंगे।
विवाह की पंजीकरण प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने की भी संभावना बताई गई है।

2. तलाक के नियमों में समानता

तलाक के मामलों में अलग-अलग धार्मिक कानूनों की जगह एक समान प्रक्रिया लागू होगी। इससे कानूनी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और स्पष्ट होगी।

3. उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकार

संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार के मामलों में भी समान नियम लागू किए जाएंगे ताकि किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव न हो।

4. लिव-इन रिलेशनशिप का प्रावधान

UCC बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी ढांचे में शामिल किया गया है। इससे ऐसे संबंधों में रहने वाले लोगों के अधिकारों की सुरक्षा होगी।

5. अनुसूचित जनजातियों को छूट

इस कानून में Scheduled Tribes (ST) समुदायों को छूट दी गई है ताकि उनके पारंपरिक और सांस्कृतिक अधिकार सुरक्षित रह सकें।


भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड की बहस

भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को यह निर्देश दिया गया है कि वह देश के नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करे

हालांकि भारत की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक संरचना के कारण यह विषय लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा रहा है।


उत्तराखंड के बाद दूसरा राज्य बना गुजरात

इससे पहले उत्तराखंड ने भी UCC लागू करने के लिए कानून पारित किया था।

अब गुजरात के इस कदम से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम उठा सकते हैं।

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गुजरात UCC बिल का संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार इस कानून के कई प्रभाव हो सकते हैं:

  • महिलाओं के अधिकार मजबूत होंगे
  • कानूनी प्रक्रियाएं सरल होंगी
  • धार्मिक आधार पर अलग-अलग कानूनों में कमी आएगी
  • राष्ट्रीय स्तर पर UCC पर बहस और तेज हो सकती है

हालांकि कुछ संगठनों और विपक्षी दलों ने इस पर अलग-अलग मत भी व्यक्त किए हैं।


निष्कर्ष

गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2026 भारत में नागरिक कानून सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह कानून राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन संबंधों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने की कोशिश करता है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य राज्य भी इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर UCC को लेकर क्या निर्णय होता है।

Anjali Almiya

By: Anjali Almiya

Last updated: March 27, 2026

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